उरीमारी. बिरसा परियोजना में कोल क्रशर के प्रदूषण से क्षेत्र के लोग काफी परेशान हैं. प्रदूषण इतना अधिक है कि घर के अंदर रखे सामान पर धूल की काली परत बिछ जाती है. पानी के ऊपर धूल की लेयर नजर आती है. भोजन-पानी कुछ भी सुरक्षित नहीं रहा. खेती-बारी चौपट हो गयी है. प्रदूषण की जद में हेसाबेड़ा व उरीमारी बस्ती पूरी तरह आ गया है. प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्रबंधन द्वारा ठोस कदम नहीं उठाने के कारण ग्रामीण कई बार आंदोलन करते हुए कोल क्रशर को बंद भी करा चुके हैं. लेकिन आंदोलन के बाद भी हालात में फर्क पैदा नहीं हुआ. हालत यह है कि ग्रामीण कई तरह की बीमारी की चपेट में आ गये हैं. सबसे ज्यादा मामले सांस व स्कीन से संबंधित है. गंभीर होती स्थिति के बाद भी प्रबंधन का फोकस केवल कोयला क्रश करने व डिस्पैच करने पर केंद्रित है. प्रदूषण की रोकथाम का कोई उपाय नहीं किया जा रहा है. क्रशर को बंद करायेंगे : दसई. विस्थापित ग्रामीण दसई मांझी ने कहा कि प्रबंधन केवल झूठे आश्वासन देता रहा है. लोग नारकीय जीवन जीने को विवश हो गये हैं. प्रदूषण ने सबकुछ तबाह करना शुरू कर दिया है. लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है. श्री मांझी ने कहा कि यदि प्रबंधन ने जल्द कुछ नहीं किया, तो ग्रामीण क्रशर को स्थायी तौर पर बंद करा देंगे. बुरी तरह प्रभावित हो रहा जीवन : कार्तिक. ग्रामीण कार्तिक मांझी ने कहा कि क्षेत्र में प्रबंधन को हर स्तर पर ग्रामीणों ने सहयोग किया. क्रशर, साइडिंग व खदान के लिए जमीन दी. इस उम्मीद में कि उनका व उनके परिवार का भविष्य खुशहाल बनेगा. लेकिन प्रदूषण से उनका जीवन प्रभावित हो रहा है. प्रबंधन को इस बात से कोई मतलब नहीं दिखता है. बच्चे व बुजुर्ग हैं ज्यादा प्रभावित : दिनेश. ग्रामीण दिनेश करमाली ने कहा कि ग्रामीणों की मांग के बावजूद न तो पानी का छिड़काव हो रहा है, न ही अन्य जरूरी कदम उठाये जा रहे हैं. स्कूल के बच्चों का यूनिफॉर्म घर से बाहर निकलने पर कुछ ही मिनटों में काला पड़ जाता है. नाक-मुंह साफ करने पर काला डस्ट निकलता है. बुजुर्ग अक्सर बीमार रहने लगे हैं.
कोल क्रशर के प्रदूषण से ग्रामीण त्राहिमाम, हो रहे बीमार
कोल क्रशर के प्रदूषण से ग्रामीण त्राहिमाम, हो रहे बीमार
