क्रिसमस की तैयारी अंतिम चरण में, मिस्सा पूजा में भाग ले रहे हैं अनुयायी

क्रिसमस की तैयारी अंतिम चरण में, मिस्सा पूजा में भाग ले रहे हैं अनुयायी

कैरोल गीत और जिंगल बेल्स की धूम है, बाजार में क्रिसमस के सामान बिक रहे हैं रामगढ़. जिले में घर से लेकर चर्च तक क्रिसमस की तैयारी अंतिम चरण में है. प्रभु यीशु के आगमन की खुशी मनाने से पहले प्रार्थना सभा हो रही है. कैरोल गीत और जिंगल बेल्स की धूम है. बाजार में क्रिसमस के सामान बिक रहे हैं. शहर के मेन रोड स्थित ब्रदर्स बेकरी, बेकर बॉय, सूरज बेकरी, शालीमार बेकरी में विशेष रूप से केक बनाये जा रहे हैं. ब्रदर्स बेकरी के संचालक कुमार रवि ने बताया कि क्रिसमस में पलम केक, फ्रूट केक, चॉकलेट केक, मावा केक की मांग अधिक हो रही है. शहर के सीएनआइ चर्च, केजी चर्च और संत मेरी चर्च सज कर तैयार है. संत मेरी चर्च की ओर से शहर की नयीसराय यूनिट में क्रिसमस गैदरिंग का आयोजन हुआ. फादर जार्ज चिटाडी ने चरनी आशीष के बाद मिस्सा पूजा करायी. फादर जार्ज ने कहा कि क्रिसमस प्रभु यीशु के आगमन का पर्व है. इसे मिलजुल कर मनाना चाहिए. प्रार्थना सभा में प्रेमचंद लकड़ा, रीता मिंज, विजय हांसदा, मीतू, संजय एक्का, मधुलिका, वेदप्रकाश, सुषमा, जीवन लकड़ा, अनुभा जेकलिन, जसिंता, सरोज, निर्मला, मनीषा शामिल थे. वहीं, शहर के सीएनआइ चर्च में पुरोहित सुधीर लकड़ा, प्रचारक एडमिन हसापूर्ति के नेतृत्व में प्रार्थना सभा हो रही है. 21 दिसंबर को चर्च में सुबह आठ बजे से 10 बजे तक आराधना कार्यक्रम होगा. बिजुलिया के समीप एजी चर्च में रेवेन जरकायाह महतो समेत धर्म से जुड़े सभी लोग विशेष प्रार्थना की तैयारी में लगे हैं. विश्वासियों के बीच जीवित है प्रेम : फादर सयजू थॉमस एसजे ने बताया कि क्रिसमस उस ईश्वर का उत्सव है, जो मानवता के पीछे निरंतर दौड़ रहा है. आज भी यह प्रेम विश्वासियों के बीच जीवित है. क्रिसमस हमें याद दिलाता है कि हम ईश्वर के लिए कितने प्रिय हैं. फादर सयजू ने बताया कि प्रभु यीशु अपनी अनंत करुणा में परम पिता ने स्वयं मनुष्य के रूप में जन्म लेने का निर्णय लिया. यही वह प्रेम कहानी है, जो हर क्रिसमस पर हमारे सामने प्रकट होती है. ईश्वर ने मनुष्य को स्वतंत्र इच्छा का अनमोल उपहार दिया है : फादर पीजे जेम्स ने कहा कि ईश्वर ने मनुष्य को स्वतंत्र इच्छा का अनमोल उपहार दिया है. प्रेम तभी सच्चा होता है, जब वह स्वेच्छा से किया जाये. ईश्वर ने अपने पुत्र को इस संसार में भेजने का निर्णय लिया. इस कार्य के लिए पिता ईश्वर को माननीय सहमति लेनी पड़ी. माता मरियम व यूसुफ ने अपनी स्वतंत्र इच्छा से ईश्वर की इस योजना को स्वीकार किया. ईश्वर के पुत्र यीशु मसीह का जन्म महल में नहीं, बल्कि बेतलेहम की साधारण चरनी में पशुओं के बीच हुआ.

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Published by: Saroj tiwary

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