रामगढ़ से महावीर प्रसाद की रिपोर्ट
भदानीनगर: पतरातू प्रखंड के किसान बहुल चिकोर पंचायत में सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं होने से कृषि व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है. कभी लिफ्ट इरिगेशन योजना के सहारे पंचायत के सैकड़ों एकड़ खेत सिंचित होते थे, लेकिन पिछले डेढ़-दो दशक से यह योजना बंद पड़ी है. इसके कारण किसान अब पूरी तरह वर्षा पर निर्भर होकर खेती करने को मजबूर हैं.
पहले लहलहाते थे खेत, अब घट रहा रकबा
ग्रामीणों के अनुसार पहले यहां धान, गेहूं के अलावा आलू, प्याज, लहसुन, गोभी, बंदगोभी, नेनुआ, खीरा, बैंगन, कोहड़ा और कद्दू जैसी फसलें बड़े पैमाने पर उगाई जाती थीं. इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत रहती थी. लेकिन सिंचाई सुविधा बंद होने के बाद खेती का रकबा लगातार घटता जा रहा है.
कई किसान खेत खाली छोड़ रहे हैं, तो कई रोजगार की तलाश में पलायन कर रहे हैं. चिकोर झुरकुटवा गढ़ा नाला और धुमका गढ़ा नाला पर लाखों रुपये की लागत से बने चेक डैम भी किसानों के लिए उपयोगी साबित नहीं हो सके हैं. किसानों का कहना है कि यदि इन डैमों को सही ढंग से चालू किया जाए तो सैकड़ों एकड़ भूमि सिंचित हो सकती है.
चेक डैम से जगी उम्मीद, नहीं मिला लाभ : आनंद महतो
किसान आनंद महतो ने बताया कि चेक डैम बनने से किसानों में उम्मीद जगी थी. इससे सिंचाई सुविधा बेहतर होने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक इसका लाभ किसानों को नहीं मिल पाया है.
खेती का खर्च बढ़ा, उत्पादन लगातार घट रहा : गंगाधर कुशवाहा
किसान गंगाधर कुशवाहा ने बताया कि पहले लिफ्ट इरिगेशन से खेतों तक आसानी से पानी पहुंचता था और अच्छी खेती होती थी, लेकिन अब खेती का खर्च बढ़ गया है और उत्पादन लगातार घट रहा है.
सिंचाई सुविधा नहीं होने से युवा खेती से दूर : जिलानी अंसारी
किसान जिलानी अंसारी ने बताया कि सिंचाई के अभाव में युवा पीढ़ी खेती से दूर होती जा रही है. यदि किसानों को पर्याप्त सिंचाई संसाधन उपलब्ध हों, तो युवा भी खेती में रुचि लेकर इसे रोजगार का बेहतर साधन बना सकते हैं.
सरकारी सहयोग के अभाव में किसान पिछड़ रहे : बारीक अंसारी
किसान बारीक अंसारी ने बताया कि पतरातू प्रखंड की खेती की अपनी अलग पहचान रही है. लेकिन सरकारी सहयोग और पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में किसान लगातार पिछड़ रहे हैं.
सरकार से की गई मांग
चिकोर पंचायत के सैकड़ों किसानों ने सरकार से लिफ्ट इरिगेशन योजना को पुनः चालू करने और चेक डैम को व्यवस्थित करने की मांग की है, ताकि खेती को फिर से पटरी पर लाया जा सके और किसानों की आर्थिक स्थिति सुधर सके.
