अंधी वृद्धा पड़ोसियों के रहमो करम पर जिंदा

अंधी वृद्धा पड़ोसियों के रहमो करम पर जिंदा 31 घाटो -1 मृत सैय्या पर पड़ी ंअधी वृद्धा मनुआ देवी प्रतिनिधि, घाटोटांड़ मांडू प्रखंड अंतर्गत इचाकडीह पंचायत के गायत्री नगर मजदूर कॉलोनी में रहने वाली दोनों आंखों से अंधी 65 वर्षीया मनुआ देवी पिछले चार सालों से पड़ोसियों के रहमो करम पर जिंदा है. उसका देख […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | October 31, 2015 10:07 PM

अंधी वृद्धा पड़ोसियों के रहमो करम पर जिंदा 31 घाटो -1 मृत सैय्या पर पड़ी ंअधी वृद्धा मनुआ देवी प्रतिनिधि, घाटोटांड़ मांडू प्रखंड अंतर्गत इचाकडीह पंचायत के गायत्री नगर मजदूर कॉलोनी में रहने वाली दोनों आंखों से अंधी 65 वर्षीया मनुआ देवी पिछले चार सालों से पड़ोसियों के रहमो करम पर जिंदा है. उसका देख रेख करने वाला कोई नहीं है.नि:संतान मनुआ देवी के रिश्तेदार भी उससे मुंह मोड़ लिये हैं . सरकारी महकमा भी उसे सहयोग नहीं कर रहा . ऐसे में वह पिछले कई वर्षों से सीसीएल के एक जर्जर क्वार्टर में अकेली रह रही है. बीमारी व अंधेपन के कारण वह एक कमरे में लावारिश पड़ी रहती है. पड़ोसियों को उस पर दया आती है तो वे कुछ खाने पीने को दे देते हैं .वरना भुखे पड़ी रहती है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक सीसीएलकर्मी सोहराई भुइंया पहली पत्नी के मर जाने के बाद उसे शादी कर लाया था . परंतु इससे भी कोई संतान नहीं हुआ .इसी बीच उसके पति सोहराई भुईंया का निधन हो गया . पति के निधन के बाद वह अकेली हो गई . परंतु स्वास्थ्य ठीक रहने के कारण वह अपना जीवन वसर कर ले रही थी . चार साल पहले वह बीमार पड़ी ,देख रेख व सरकारी मदद के अभाव में उसकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई . इसके बाद से ही वह पूरी तरह से पड़ोसियों के रहमो करम पर जीने लगी . कई बार सरकार से मदद की गुहार लगायी . परंतु सरकारी महकमे से उसे किसी तरह का कोई सहयोग नहीं मिला . यहां तक कि लाल कार्ड व वृद्धा पेंशन के लिए भी पंचायत जन प्रतिनिधियों से गुहार लगाती रही . आंख का ऑपरेशन करावा देने की मिन्नतें की ताकि वह चल फिर कर अपना नित्य क्रिया कर सके .परंतु कहीं से कोई सहयोग नहीं मिला . थक हार कर उसने अपने आप को पड़ोसियों के रहमो करम पर छोड़ दिया . अभी वह एक कमरे में टूटी खाट पर पड़ी रहती है.साफ सफाई देख रेख के अभाव में उस कमरे से बास आती है. स्थानीय लोगों ने बताया कि यदि सरकारी तंत्र इसे गंभीरता से नहीं लिया तो वह कभी भी काल के गाल मेें समा सकती है.