धनेश्वर प्रसाद/प्रदीप, कुजू : देश और विदेश में भगवान शंकर के कई मंदिर स्थापित हैं जिनका अपना अलग-अलग महत्व है. लेकिन रामगढ़ शहर से आठ किलोमीटर दूर सांडी स्थित सदियों पुरानी प्राचीन शिव मंदिर टूटी झरना का महत्व कुछ और ही है. इस मंदिर के गर्भ गृह में स्थापित शिवलिंग पर निरंतर अविरल जलधारा गिरते रहती है. यह जलधारा कहां से आती है इसका पता आज तक कोई नहीं लगा सका़
श्रद्धालु कहते हैं कि शवलिंग पर जलाभिषेक कोई और नहीं बल्कि मां गंगा स्वयं करतीं हैं. मंदिर का रहस्य व लगातार गिरती अविरल धारा को देखने के लिए सालों भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. ऐसे अगर देखा जाये तो दिसंबर माह से लेकर जनवरी के अंतिम माह तक सैलानियों का हुजूम यहां लगा रहता है.
मंदिर के बगल से गुजरी नदी, हरे -भरे पेड़-पौधे तथा रेलवे लाइन की मनोरम वादियों को देख कर सैलानी काफी प्रफुल्लित होते हैं. बुजुर्ग बताते हैं कि सन 1925 में रेलवे लाइन निर्माण कार्य के दौरान पानी की तलाश में खुदाई के दौरान मंदिर के टीले को देखा गया था इसके बाद कई साधु-संत वहां पर रहें. बाद में महंत रघुनाथ दास बाबा ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया.
गर्भगृह व हैंडपंप से स्वतः गिरता रहता है सालों भर पानी
प्राचीन शिव मंदिर टूटी झरना में भगवान भोले शंकर का शिवलिंग स्थापित है. यहां गर्भगृह से स्वतः सालों भर पानी शिवलिंग पर गिरता रहता है. यही नहीं बल्कि मंदिर के पूर्वी छोर पर करीब 50 मीटर की दूरी पर कराये गये डीप बोरिंग से भी बिना हैंडपंप लगाये ही पानी गिरता है. आश्चर्य तो तब होता है जब भीषण गर्मी में मंदिर के आसपास के क्षेत्रों में पानी की किल्लत हो जाती है. उस समय भी बोरिंग हैंड पंप से तथा शिवलिंग के ऊपर लगातार पानी गिरता रहता है.
मंदिर में विवाह रचाना शुभ मानते हैं लोग
शादी-विवाह के मौसम लोग यहां आते है़ं इस मंदिर में शहनाईयां बजने लगती है जिसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती है. विवाह रचानेवाले जोड़ों की भीड़ यहां लगी रहती है. लोगों का मानना है कि प्राचीन शिव मंदिर टूटी झरना में विवाह रचाने से नव दंपति का दांपत्य जीवन सुखमय गुजरता है.
