कुजू : केंद्र व राज्य सरकार किसी भी योजना को जनहित में ध्यान में रख कर करती है, लेकिन वही कार्य लोगों के लिए अगर जानलेवा हो जाये, तो चिंतित होना स्वाभाविक होगा. एक ऐसा ही उदाहरण मांडू प्रखंड के छोटकी डूंडी पंचायत स्थित रामजानकी तालाब की है. गांव के पूर्वजों ने अपनी जमीन मंदिर के नाम से दान दिया था. साथ ही उक्त जमीन पर ग्रामीणों के सहयोग से तालाब निर्माण किये जाने के साथ सीढ़ी भी बनवाया गया था.
जहां ग्रामीणों द्वारा इस तालाब में सालों भर महिला पुरुष ग्रामीण नहाने, कपड़ा धोने से लेकर अपने धार्मिक अनुष्ठान कार्य संपन्न कराते थे, लेकिन भूमि संरक्षण विभाग हजारीबाग द्वारा करीब 23 लाख रुपये की लागत से तालाब का गहरीकरण किया जा रहा है. जो अंतिम चरण पर है. फिलहाल तालाब का गहरीकरण इतना अधिक हो गया है कि लगता है कि उक्त तालाब कुआं बन गया है जिससे ग्रामीण काफी चिंतित हैं. अगर तालाब में सीढ़ी का निर्माण नहीं किया गया, तो भविष्य में बड़ी दुर्घटना होने से इंकार नहीं किया जा सकता है.
ग्रामीणों की मंशा पर फिरा पानी
ग्रामीणों के सहयोग से खोदा गया इस तालाब के जीर्णोद्धार को लेकर कुछ राजनीतिक दल लोगों ने सूबे के मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी से मुलाकात कर उन्हें बताया कि तालाब में ग्रामीणों का सालों भर नहाने धोने का कार्य होता है. लेकिन गर्मी के दिनों में पानी कम हो जाती है और उसका निकासी भी नहीं हो पाता. जिसके कारण तालाब का पानी दूषित हो जाता है. जिसके बाद मंत्री श्री चौधरी के पहल पर भूमि संरक्षण विभाग हजारीबाग द्वारा तालाब गहरीकरण की स्वीकृति दी गयी. जिस कार्य को कराने की जिम्मा मंदिर समिति को दी गयी है. लेकिन ग्रामीण जिस मंशा से तालाब का जीर्णोद्धार कराना चाहते थे उस पर पानी फिर गया. आलम यह है कि तालाब पूरी तरह सीढ़ी के अभाव में भयावह हो गया है.
क्या कहती हैं मुखिया
इस संबंध में छोटकी डुंडी पंचायत की मुखिया फूलकी देवी ने कहा कि राम जानकी की भूमि एक धार्मिक स्थल है. भविष्य में किसी तरह की अप्रिय घटना न हो इसका ध्यान रखते हुए तालाब में गहरीकरण के साथ सीढ़ी का भी निर्माण हो. हालांकि उन्होंने कहा कि फिलहाल करीब 12 फीट तालाब का गहरीकरण हो गया है. लोगों की सुविधा के लिए पूर्व में थोड़ा सा सीढ़ी बनाया गया था. लेकिन गहरीकरण से उक्त सीढ़ी भी बेकार हो गया है. उक्त मामले में को लेकर अधिकारियों से मुलाकात कर सीढ़ी निर्माण कराने की मांग की जायेगी.
