जाको राखे साइयां मार सके न कोय

जाको राखे साइयां मार सके न कोय

प्रतिनिधि,पाटन

यह घटना कबीरदास की उक्ति “जाको राखे साइयां मार सके न कोय” को साकार करती है. बुधवार शाम प्रदीप सिंह मेदिनीनगर से अपने गांव लौट रहे थे. हिसराबरवाडीह के पास अचानक तेज आंधी-तूफान शुरू हो गया. बचने के लिए वे सड़क किनारे स्थित एक प्रज्ञा केंद्र की ओर मुड़े, तभी हवा में उड़कर आया पुटूस की झाड़ियों का भारी बोझा उनके ऊपर गिर गया. बाइक पलट गई और उनका पैर नीचे दब गया, जिससे घुटने की चकरी फ्रैक्चर हो गया.

प्रदीप असहाय सड़क किनारे पड़े थे. तभी पाटन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. मिथिलेश कुमार और कुछ ग्रामीणों ने उन्हें देखा. सभी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत मदद की और प्रदीप को बाइक व मलबे से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया. कुछ ही सेकंड बाद तेज हवा से सड़क किनारे लगे शीशम के पेड़ की भारी टहनी ठीक उसी जगह गिर पड़ी, जहाँ प्रदीप पहले पड़े थे. यदि उन्हें तुरंत न हटाया जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था. बाद में एम्बुलेंस से उन्हें अस्पताल भेजा गया, जहां वर्तमान में उनका इलाज चल रहा है और घुटने का ऑपरेशन होना है.

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Author: Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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