विकास के मुद्दों पर टिकी शहरवासियों की नजर

मेयर पद के 11 प्रत्याशी मैदान में, बुनियादी सुविधाओं और अधूरे वादों पर जनता का फोकस

मेयर पद के 11 प्रत्याशी मैदान में, बुनियादी सुविधाओं और अधूरे वादों पर जनता का फोकस प्रतिनिधि, मेदिनीनगर राज्य निर्वाचन आयोग की देखरेख में मेदिनीनगर नगर निगम चुनाव की प्रक्रिया जारी है. नगर निगम के मेयर व वार्ड पार्षद पद के लिए 23 फरवरी को मतदान होना है. मेयर पद के लिए कुल 11 प्रत्याशी चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. गौरतलब है कि वर्ष 2017 में शहर के आसपास के 16 राजस्व गांवों को शामिल कर मेदिनीनगर नगर परिषद को प्रमोट कर नगर निगम का दर्जा दिया गया था. इसके बाद अप्रैल 2018 में नगर निगम का पहला चुनाव संपन्न हुआ. वर्ष 2023 में प्रथम कार्यकाल पूरा होने के बाद अब दूसरे कार्यकाल के लिए चुनाव कराया जा रहा है. नगरपालिका के पूर्व वार्ड कमिश्नर कामेश्वर प्रसाद ने बताया कि यह चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण है. उनके अनुसार, बीते पांच वर्षों में शहर के विकास के लिए कई कार्य हुए, लेकिन अपेक्षा के अनुरूप विकास नहीं हो सका. शहर की कई बुनियादी समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं. उन्होंने कहा कि नगर निगम में शामिल नए क्षेत्रों के लोगों को अभी तक मूलभूत सुविधाओं का समुचित लाभ नहीं मिल सका है, जबकि होल्डिंग टैक्स की नियमित वसूली की जा रही है. ऐसे में लोगों की उम्मीदें इस चुनाव से काफी बढ़ गयी हैं. श्री प्रसाद ने कहा कि चुनाव के बाद जो भी जनप्रतिनिधि निर्वाचित होंगे, उनके सामने जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना बड़ी चुनौती होगी. शहर में पेयजल संकट, स्वच्छता व्यवस्था, ट्रैफिक जाम, स्ट्रीट लाइट की समस्या सहित कई मुद्दे गंभीर बने हुए हैं। खास महाल जमीन को फ्री होल्ड कराने का मामला भी वर्षों से लंबित है. उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1980 में वे नगरपालिका के वार्ड संख्या तीन से कमिश्नर निर्वाचित हुए थे. उस समय शहर की आबादी कम थी और सरकार से मिलने वाला अनुदान भी सीमित था. विभिन्न स्रोतों से नगरपालिका को कम राजस्व प्राप्त होता था, जिससे व्यवस्था संचालन में कठिनाई होती थी. उन्होंने कहा कि नगर निगम बनने के बाद स्थिति में काफी बदलाव आया है. केंद्र व राज्य सरकार की कई कल्याणकारी और विकास योजनाओं का क्रियान्वयन हो रहा है. सरकार पर्याप्त राशि उपलब्ध करा रही है. साथ ही होल्डिंग टैक्स, पानी टैक्स, दुकानों के किराया और सैरातों की बंदोबस्ती से भी नगर निगम को अच्छी-खासी आय हो रही है. ऐसे में अब शहर की समस्याओं के समाधान और सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देना जरूरी है. उन्होंने कहा कि हर हाल में नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर निगम की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए.

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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