मेदिनीनगर. विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता संतोष कुमार सिन्हा, कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार और सहायक अभियंता विकास कुमार के खिलाफ फर्जी हस्ताक्षर और कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप में दर्ज प्राथमिकी के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है. मंगलवार को सदर एसडीपीओ राजेश कुमार यादव विद्युत विभाग के कार्यालय पहुंचे और मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की. पुलिस ने विभाग से इश्यू और डिस्पैच रजिस्टर उपलब्ध कराने को कहा है. इसके अलावा विभागीय अधिकारियों और संवेदक के बीच हुई बातचीत से संबंधित सीडीआर भी मांगी गयी है, ताकि पूरे मामले में हुए संचार की कड़ियों की जांच की जा सके.
दस्तावेजों की जांच के बाद सामने आयेगी सच्चाई
सदर एसडीपीओ राजेश कुमार यादव ने बताया कि मंगलवार से मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गयी है. जांच के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों, रजिस्टर और अन्य साक्ष्यों का मिलान किया जायेगा. पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जायेगी. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जिन दस्तावेजों को लेकर आरोप लगाया गया है, वे वास्तविक हैं या उनमें किसी तरह की छेड़छाड़ अथवा जालसाजी की गयी है.
संवेदक ने लगाया हस्तलिखित आवेदन में छेड़छाड़ का आरोप
मीनाक्षी एंटरप्राइजेज की प्रोपराइटर मीनाक्षी सिंह ने आरोप लगाया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में उनकी कंपनी द्वारा 32 स्थानों पर विद्युत तारपोल लगाने और 10 स्थानों पर मरम्मत का कार्य किया गया था. इन कार्यों से संबंधित 17 प्राक्कलन के साथ आवंटन संबंधी पत्र विभाग को उपलब्ध कराया गया था.
एसडीपीओ स्तर से मामले की जांच
संवेदक का आरोप है कि उनके हस्तलिखित आवेदन में छेड़छाड़ करते हुए आवेदन की तारीख और संख्या बदल दी गयी. इस मामले को लेकर उन्होंने 25 मई को एसपी को आवेदन देकर शिकायत की थी. एसपी के निर्देश पर सदर एसडीपीओ स्तर से मामले की जांच करायी गयी. इसके बाद शहर थाना के एसआई बालकृष्ण को जांच की जिम्मेदारी दी गयी थी. जांच रिपोर्ट के आधार पर एसपी ने प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया, जिसके बाद शहर थाना में तीनों अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी.
लेटर पैड और हस्ताक्षर की कॉपी-पेस्ट का आरोप
मीनाक्षी सिंह ने आरोप लगाया है कि उनके मूल लेटर पैड को स्कैन कर कलर प्रिंटर के माध्यम से फर्जी लेटर पैड तैयार किया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुराने हस्ताक्षर की कॉपी-पेस्ट कर कथित फर्जी दस्तावेज तैयार किये गये. संवेदक के अनुसार, उनके वास्तविक पत्रांक 145 दिनांक 31 मई 2025 और पत्रांक 146 दिनांक 18 जून 2025 को कथित रूप से बदलकर 3 नवंबर 2025 की तारीख अंकित की गयी. उन्होंने दूसरे कथित फर्जी पत्र को आवंटन संख्या 2674/एसई/डीगंज/11.12.25 से संबंधित बताया है.
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व्हाट्सएप कॉल के जरिये तारीख बदलने का आरोप
मीनाक्षी सिंह का आरोप है कि 3 नवंबर 2025 को शाम करीब 6:11 बजे अधीक्षण अभियंता के नंबर से उन्हें व्हाट्सएप कॉल किया गया था. आरोप के अनुसार, बातचीत के दौरान पत्र की तारीख बदलने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया. अब पुलिस सीडीआर और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर इस आरोप की भी जांच कर रही है. संवेदक ने बताया कि मामला एमएसएमई झारखंड में भी विचाराधीन है. उन्होंने आरोप लगाया है कि महिला संवेदक होने के कारण उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान किया गया.
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रजिस्टर और सीडीआर से सुराग मिलने की उम्मीद
पुलिस की जांच में अब विभागीय इश्यू और डिस्पैच रजिस्टर की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इन रजिस्टरों के माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास किया जायेगा कि संबंधित पत्र कब जारी हुए, किसके माध्यम से भेजे गये और विभाग में उनकी प्राप्ति कब हुई. वहीं विभागीय अधिकारियों और संवेदक के बीच हुई बातचीत की सीडीआर से घटनाक्रम की टाइमलाइन तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
फिलहाल पुलिस दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों को जुटाकर मामले की तह तक पहुंचने में लगी है. जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेज तैयार करने के आरोपों में कितनी सच्चाई है और इस पूरे प्रकरण में किसकी भूमिका रही है.
