पलामू टाइगर रिजर्व में गर्मी से हाहाकार, पानी की तलाश में बस्तियों की ओर भाग रहे जानवर

Latehar News: झारखंड में भीषण गर्मी और लू के कारण पलामू टाइगर रिजर्व में हालात बिगड़ गए हैं. पानी की तलाश में वन्यजीव सुरक्षित क्षेत्र छोड़कर रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

संतोष कुमार की रिपोर्ट 

Latehar News: बेतला नेशनल पार्क सहित पूरा पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) इस समय भीषण और जानलेवा गरमी की चपेट में है. कभी ठंडी बयार के लिए मशहूर रहने वाले पलामू टाइगर रिजर्व का पारा 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है. जंगलों में भी गर्म हवाएं चल रही है. जंगल सफारी के दौरान हीटवेव (लू ) का कहर का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए पर्यटकों का आगमन बैकफुट पर चला गया है. आसमान से बरसती आग ने इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जानवरों का जीना भी दूभर कर दिया है. भीषण तपिश और लू के थपेड़ों से जंगलों में हाहाकार मचा है, जिससे जंगली जानवर अत्यधिक बेचैन हैं. नवजात और नन्हें जंगली जानवरों की मौत की अपुष्ट खबरें मिल रही है. सदियों पुराने कई प्राकृतिक जलस्रोतों को सुख गए है. पानी की एक-एक बूंद के लिए जंगलों में त्राहि-त्राहि मची है. बेकाबू प्यास और भीषण बेचैनी से तड़पते जानवर अब रिजर्व की सुरक्षित सीमा को छोड़कर बाहरी रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं, जहां मौत के सौदागर (शिकारी) हाथ में फंदे और जहर लिए उनके इंतजार में बैठे शिकार कर रहे हैं.

सूख गए प्राकृतिक जलस्रोत, कृत्रिम व्यवस्थाएं नाकाफी

हिरण बंदर, लंगूर,गौर और जंगली सुअर पानी की तलाश में पागलों की तरह भटक रहे हैं. हालांकि वन विभाग ने कुछ जगहों पर टैंकरों के जरिए कृत्रिम वॉटर होल (जलपात्र) भरने का दावा किया है, लेकिन यह व्यवस्था ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हो रही है. कड़कड़ाती धूप में इन कृत्रिम गड्ढों का पानी भी कुछ ही घंटों में खौलने लगता है, जो जानवरों के पीने लायक नहीं बचता. जंगल में पानी न मिलने के कारण मजबूरन वन्यजीवों के झुंड रिजर्व से सटे ग्रामीण इलाकों, खेतों और रिहायशी बस्तियों की तरफ आ रहे हैं. जानकारी के अनुसार बाहरी इलाकों और बचे-खुचे पानी के गड्ढों के पास शिकारियों ने गुप्त फंदे (फांस) लगा दिये हैं. प्यास से बेहाल जानवर जैसे ही पानी पीने नीचे झुकते हैं, वे इन फंदों का शिकार हो जा रहे हैं. इसके अलावा, कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा पानी में जहरीले पदार्थ मिलाने की भी आशंका बनी हुई है, जिससे सामूहिक शिकार का खतरा मंडरा रहा है.

रात भर गांवों के आसपास मंडराते हैं जानवर: ग्रामीण 

पीटीआर की सीमा से सटे गांवों के ग्रामीणों ने बताया कि ऐसी गर्मी पहले कभी नहीं देखी थी. पानी की तलाश में हिरण, बाइसन और जंगली सुअर रोज हमारे खेतों की तरफ आ रहे हैं. हाल ही में बाइसन ने एक को मार डाला है. रात को डर के मारे कोई घर से बाहर नहीं निकलता. जंगल के अंदर पानी बिल्कुल नहीं है. कुछ बाहरी लोग रात के समय पानी के गड्ढों के पास संदिग्ध हालत में घूमते देखे गए हैं, जो पक्के तौर पर शिकार के इरादे से आते हैं.

हम अलर्ट पर हैं, टैंकरों से की जा रही पानी की सप्लाई: रेंजर 

रेंजर उमेश कुमार दुबे ने कहा कि तापमान अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है,स्थिति पर पूरी नजर रखे हुए हैं. कृत्रिम वॉटर होल्स में टैंकरों के जरिए लगातार पानी भरा जा रहा है. इसके साथ ही कुछ चुनिंदा बोरवेल को सोलर पंप से जोड़ा गया है जिससे पानी की निरंतर आपूर्ति हो सके. वहीं शिकार की आशंका को देखते हुए हमारी एंटी-पोचिंग (शिकार विरोधी) टीम और वनकर्मियों की गश्त चौबीसों घंटे बढ़ा दी गई है. ग्रामीणों के साथ मिलकर इको-विकास समिति को सक्रिय किया गया है जिससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना मिल सके.

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Published by: Priya Gupta

प्रिया गुप्ता प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह झारखंड बीट पर काम कर रही हैं, जहां वह खबरों को आसान भाषा में लिखती हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल बीट पर काम कर चुकी हैं, जहां उन्होंने हेल्थ, रेसिपी, मेहंदी डिजाइन और फैशन से जुड़ी खबरों पर काम किया. इसके अलावा, उन्होंने नेशनल प्रिंटर और लोकल चैनलों में भी काम किया है. उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से और मास्टर की पढ़ाई एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड से पूरी की है.

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