पलामू से चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट
Palamu News: झारखंड में जेटेट (झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा) की नियमावली में स्थानीय भाषाओं को शामिल नहीं किए जाने को लेकर सियासत गरमा गई है. शुक्रवार को भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के नेतृत्व में पलामू के मेदिनीनगर में जोरदार आक्रोश रैली निकाली गई. इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र-युवा और भाजपा कार्यकर्ता शामिल हुए.
भारत माता चौक से निकली आक्रोश रैली
प्रदर्शन की शुरुआत संस्कृत विद्यालय भारत माता चौक (साहित्य समाज चौक) से हुई. यहां से रैली शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए छहमुहान चौक तक पहुंची. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जेटेट नियमावली में बदलाव की मांग उठाई.
छहमुहान चौक पर घेराव, यातायात पूरी तरह ठप
रैली के छहमुहान चौक पहुंचते ही प्रदर्शनकारियों ने चौक का घेराव कर दिया. इससे इलाके में यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. पुलिस और प्रशासन को स्थिति संभालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी.
मगही-भोजपुरी नहीं होने पर नाराजगी
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जेटेट की नई नियमावली में पलामू जिला की भाषा सूची से हिंदी, मगही और भोजपुरी को बाहर रखा गया है. वक्ताओं ने कहा कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है और उनका भविष्य अधर में लटक गया है.
युवाओं के हक की लड़ाई तेज करेंगे: भाजपा नेता
भाजपा नेताओं ने मंच से कहा कि यह हेमंत सरकार की युवा और छात्र विरोधी नीति का परिणाम है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही भाषा सूची में संशोधन नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. नेताओं ने कहा कि पलामू के युवाओं के अधिकारों के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ी जाएगी.
कई बड़े नेता और कार्यकर्ता रहे मौजूद
इस प्रदर्शन में डालटनगंज विधायक आलोक कुमार चौरसिया, पांकी विधायक डॉ. शशिभूषण मेहता, मेदिनीनगर नगर निगम की मेयर अरुणा शंकर, भाजपा जिलाध्यक्ष अमित कुमार तिवारी सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए. इसके अलावा भाजयुमो जिलाध्यक्ष डॉ. विपुल गुप्ता, ज्योति पांडेय, किसलय तिवारी और शिवकुमार मिश्रा समेत बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे.
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राजनीतिक रंग लेता जा रहा है मुद्दा
जेटेट में भाषा को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है. एक तरफ विपक्ष इसे युवाओं के साथ अन्याय बता रहा है, वहीं सरकार की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है.
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