मेहनत सफलता का द्वार खोलता है : पीडीजे

अधिवक्ता संघ भवन में सच्चिदानंद त्रिपाठी की पुण्यतिथि मनायी गयी

अधिवक्ता संघ भवन में सच्चिदानंद त्रिपाठी की पुण्यतिथि मनायी गयी प्रतिनिधि, मेदिनीनगर रविवार को कचहरी परिसर में अधिवक्ता संघ भवन के ऊपरी तल्ला पर पूर्व विधायक सह वरिष्ठ अधिवक्ता सच्चिदानंद त्रिपाठी की पुण्यतिथि मनायी गयी. इसका आयोजन अधिवक्ता शशिभूषण दुबे ने किया. समारोह में मुख्य अतिथि पलामू के प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश श्रीराम शर्मा, एडीजे अखिलेश कुमार, श्वेता ढींगरा, सीजेएम मनोरंजन कुमार, डालसा सचिव राकेश रंजन, रजिस्ट्रार कमल प्रकाश,अधिवक्ता संघ के उपाध्यक्ष विनोद तिवारी व ट्रस्ट के संयोजक ध्रुव शंकर दुबे ने संयुक्त रूप से एसएन त्रिपाठी के चित्र पर पुष्पांजलि कर किया गया. अतिथियों को शॉल ओढ़ाकर व धार्मिक ग्रंथ रामायण भेट कर सम्मानित किया गया. मौके पर पीडीजे श्रीराम शर्मा ने कहा कि मेहनत सफलता का द्वार खोलता है. सफल वही होते हैं, जो निरंतर लगे रहते हैं. वकालत के पेशे में शॉर्टकट नही होता है, जो मेहनती होते हैं, भगवान उन्हें सफलता अवश्य देते हैं. पीडीजे श्री शर्मा ने कहा कि सेक्सेस के लिए निरंतर मेहनत करना पड़ता हैं. उन्होंने कहा कि एक जजमेंट तभी अच्छा लिखा जा सकता हैं, जब अधिवक्ता पूरा मेहनत कर कोर्ट में आते हैं. मौके पर विशिष्ट अतिथि एडीजे वन अखिलेश कुमार ने कहा कि सच्चिदानंद त्रिपाठी कार्य के प्रति वफादार रहे थे. उनका कार्य हमेशा बार की ओर सकारात्मक रहा था. स्वर्गीय त्रिपाठी के जीवनी से हम सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए वे समय के साथ चलते थे. उनके विशेषताओ को आत्मसात करने की जरूरत है. उनके पदचिन्हों पर चलना ही उनके लिए सच्चा श्रद्धांजलि होगा. वरिष्ट अधिवक्ता महेंद्र तिवारी ने कहा कि स्वर्गीय त्रिपाठी जूनियर अधिवक्ता को सुझाव देते थे कि एक रूलिंग सप्ताह में जरूर पढ़ें. इससे लॉ का कंसेप्ट व बोल्डनेस आयेगा. कोर्ट में किस तरह प्लेस करना है. वे हमेशा जूनियर को प्रोत्साहित करते थे. स्वर्गीय त्रिपाठी के नाती शशिभूषण दुबे ने कहा कि स्वर्गीय त्रिपाठी 14 अप्रैल 1950 में वकालत शुरू किये थे. वे 1962 से 1967 तक डालटनगंज भंडरिया विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया. 37 वर्षों तक अधिवक्ता के रूप में कार्य किये. उन्होंने कहा कि स्वर्गीय त्रिपाठी एक दिन में चार कोर्ट में पेश होकर बहस करते थे. गढ़वा ,पलामू लातेहार के अलावा रांची उच्च न्यायालय में भी बहस कर समय के बेहद पाबंद थे. आठ मार्च 1987 में उनका देहावसान हो गया. मौके पर 12 अधिवक्ता को पलामू के प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश श्री राम शर्मा ने अधिवक्ता में अवधेश कुमार पांडेय, चंद्रभूषण मिश्रा, मदन तिवारी, अजय कुमार पांडेय, योगेंद्र प्रसाद सिंह, ज्वाला दुबे, जयशंकर प्रसाद, प्रदीप कुमार सिंह, रंजन कुमार सिंह, जावेद अख्तर खान ,जसवंत कुमार तिवारी, अरुण कुमार ओ शॉल ओढ़ाकर व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता दिवाकर दुबे ने किया.

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Author: Akarsh Aniket

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