38 केंद्रों पर शुरू हुआ व्यावसायिक अंडा उत्पादन

38 केंद्रों पर शुरू हुआ व्यावसायिक अंडा उत्पादन

शिवेंद्र कुमार, मेदिनीनगर झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. इसी कड़ी में पलामू जिले के विभिन्न प्रखंडों में जेएसएलपीएस के सहयोग से 38 स्थानों पर बड़े पैमाने पर अंडा उत्पादन कार्य शुरू किया गया है.परियोजना के तहत जिले के मनातू, लेस्लीगंज, बिश्रामपुर, चैनपुर, सतबरवा और रामगढ़ प्रखंडों को चुना गया है. इन क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक से केज (पिंजरा) बनाकर मुर्गी पालन किया जा रहा है. प्रबंधन को बेहतर रखने के लिए प्रत्येक केज में अधिकतम 100 मुर्गियां ही रखी जाती हैं.इस स्वरोजगार योजना को धरातल पर उतारने के लिए जेएसएलपीएस प्रति लाभार्थी 1,08,000 रूपये की वित्तीय मदद दे रहा है. वहीं, योजना में जुड़ाव और जिम्मेदारी तय करने के लिए लाभार्थी को अपनी ओर से मात्र 21,000 रुपये का अंशदान करना होता है. रोजाना 3,040 अंडों का उत्पादन, खुले बाजार में बिक्री जिले में कुल 38 उत्पादन इकाइयां (यूनिट) सक्रिय हैं.प्रति यूनिट 70 से 80 अंडे रोज उत्पादन होता है इस तरह कुल दैनिक उत्पादन 3,040 अंडे प्रतिदिन है.लाभार्थी इन अंडों को सीधे खुले बाजार में बेचकर नकद मुनाफा कमा रहे हैं. 18 महीने तक अंडा उत्पादन, फिर होती है मांस की बिक्री चूजा पालन के 120 दिनों बाद मुर्गी अंडा देना शुरू करती है. यह सिलसिला लगातार 18 महीनों तक चलता है.इसके बाद मुर्गियों को मांस के लिए बेच दिया जाता है. अंडों की बिक्री से होने वाली कमाई से ही मुर्गियों के दाने का खर्च निकाला जाता है. एक मुर्गी को प्रतिदिन औसतन 100 ग्राम दाना दिया जाता है.बर्ड फ्लू जैसी घातक बीमारियों से बचाव के लिए जेएसएलपीएस सभी लाभार्थियों को एक विशेष मेडिकल किट उपलब्ध कराता है, जिससे समय पर दवाइयां दी जा सके.सर्दियों की तुलना में अत्यधिक गर्मी के दिनों में मुर्गियों में अंडा देने की क्षमता (उत्पादन दर) कम हो जाती है, जिससे निबटने के लिए शेड प्रबंधन पर ध्यान दिया जा रहा है. इस योजना से आत्मनिर्भर बनीं चैनपुर प्रखंड की लाभार्थी महिला इस योजना से जुड़कर बेहद खुश हैं. उन्होंने कहा कि पहले घर चलाने के लिए पूरी तरह खेती या मजदूरी पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे बमुश्किल खर्च चलता था. जब से जेएसएलपीएस के सहयोग से 100 मुर्गियों का केज (यूनिट) मिला है, मेरी जिंदगी बदल गयी है. रोजाना 75-80 अंडे मिल जाते हैं, जिन्हें बाजार में बेचकर अच्छी आमदनी हो रही है. अंडों की कमाई से ही मुर्गियों का दाना भी आ जाता है और घर के खर्च के लिए पैसे भी बच जाते हैं. अब मैं अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ा पा रही हूं. क्या कहते हैं डीपीएम जेएसएलपीएस के जिला कार्यक्रम प्रबंधक ने कहा कि जेएसएलपीएस का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है. लेयर फार्मिंग (अंडा उत्पादन) के माध्यम से महिलाएं हर दिन नकद आमदनी कर रही हैं. इससे न केवल उनके परिवारों की आय बढ़ी है, बल्कि स्थानीय स्तर पर पोषण की उपलब्धता भी सुधरी है.आने वाले समय में जिलों के अन्य प्रखंडों में भी इसका विस्तार किया जायेगा.

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Published by: Akarsh aniket

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