40 लाख रुपये की लागत से स्टेनर गैलरी लगायी गयी थी, दावा किया गया था कि अब नियमित जलापूर्ति होगी
प्रतिनिधि : मेदिनीनगर भीषण गर्मी के बीच शहरी और ग्रामीण इलाकों में जल संकट गहराता जा रहा है. नगर निगम क्षेत्र के रेडमा के करमाही टोला सहित कई जगहों पर लोग पानी की कमी से जूझ रहे हैं. बारालोटा जलापूर्ति योजना से लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है. बताया जाता है कि पिछले कई महीनों से इस योजना के तहत दो दिन के अंतराल पर ही जलापूर्ति की जा रही है, जिससे आमजन परेशान हैं. नगर निगम में शामिल होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि जलापूर्ति व्यवस्था सुधरेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. निगम प्रशासन ने व्यवस्था सुधारने के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए, फिर भी हालात जस के तस बने हुए हैं. हाल ही में बारालोटा जलापूर्ति केंद्र के भुसही प्लांट में 40 लाख रुपये की लागत से स्टेनर गैलरी लगायी गयी थी. दावा किया गया था कि अब नियमित जलापूर्ति होगी, लेकिन तकनीकी खराबियों के कारण यह संभव नहीं हो पाया.भुसही प्लांट में 75 एचपी के तीन मोटर पंप लगे हैं, जिनमें से एक मोटर और स्टार्टर खराब है. वहीं चियांकी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में 60 एचपी के तीन मोटर हैं, जिनमें से एक पिछले वर्ष से ही खराब पड़ा है. ऑपरेटरों के अनुसार, इन्हीं तकनीकी खराबियों के कारण नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है. नगर निगम के अभियंता अवध कुमार ने बताया कि तकनीकी समस्याओं को दूर करने का प्रयास जारी है और जल्द ही व्यवस्था को दुरुस्त किया जायेगा.
वार्ड 18 के पार्षद विवेकानंद त्रिपाठी ने कहा कि योजना कुछ समय तक ठीक चली, लेकिन बाद में जलापूर्ति अनियमित हो गयी. निगम प्रशासन ने हैंडओवर लेने के बाद भी इसे व्यवस्थित नहीं किया. लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद डेढ़ साल से लोगों को दो दिन के अंतराल पर ही पानी मिल रहा है. बारालोटा जलापूर्ति योजना के तहत नगर निगम क्षेत्र के नौ वार्डों और सदर प्रखंड के चियांकी, रजवाडीह, जमुने पंचायत में पानी की आपूर्ति की जाती है. लेकिन लगातार तकनीकी खराबियों और प्रशासनिक लापरवाही के कारण लोग जल संकट से जूझ रहे हैं.
