पाकुड़ : लिट्टीपाड़ा प्रखंड के हाथीबथान गांव निवासी चंपा मुनि के गर्भ में पल रहे जुड़वा बच्चों की मौत का मामला सामने आया है. परिजनों ने सोनाजोड़ी स्थित सदर अस्पताल में इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है. हालांकि, बच्चों की मौत के कारणों की स्वतंत्र चिकित्सकीय पुष्टि नहीं हो सकी है.
तबीयत बिगड़ने पर सदर अस्पताल लाया गया
चंपा मुनि की मां ललिता मडैया ने बताया कि उनकी पुत्री का इलाज पहले साहिबगंज स्थित किरणमाला अस्पताल में चल रहा था. तबीयत बिगड़ने पर 24 अगस्त की शाम करीब छह बजे उसे सोनाजोड़ी स्थित सदर अस्पताल लाया गया, जहां उसे भर्ती कराया गया.
डॉक्टर से जांच नहीं कराने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि भर्ती होने के बाद नर्स ने महिला की जांच की, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने उसे नहीं देखा. परिजनों का यह भी कहना है कि महिला का अल्ट्रासाउंड नहीं कराया गया.
निजी नर्सिंग होम में पहुंचने पर सामने आयी जानकारी
परिजनों के अनुसार, महिला की तबीयत बिगड़ने पर 25 अगस्त की सुबह करीब तीन बजे उसे पुलिस लाइन के समीप स्थित एक निजी नर्सिंग होम ले जाया गया. वहां जांच के दौरान चिकित्सक ने बताया कि गर्भ में पल रहे दोनों बच्चों की मौत हो चुकी है.
निजी चिकित्सक ने दी इलाज की जानकारी
निजी नर्सिंग होम में महिला का इलाज करने वाले डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि नर्सिंग होम लाने के बाद महिला की जांच की गयी. जांच में गर्भ में पल रहे दोनों बच्चों की मौत की जानकारी मिली. उन्होंने बताया कि महिला का इलाज किया गया है और फिलहाल उसकी स्थिति ठीक है.
शिकायत मिलने पर होगी जांच
सोनाजोड़ी सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. सोहेल अनवर ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि शाम छह बजे के बाद अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं होती है. डॉक्टर के मौजूद नहीं होने के परिजनों के आरोप पर उन्होंने कहा कि डॉक्टर का मौजूद नहीं होना संभव नहीं है. यदि परिजन लिखित शिकायत करते हैं, तो मामले की जांच करायी जाएगी.
