प्रतिनिधि, पाकुड़. जिला मुख्यालय सहित प्रखंड क्षेत्रों में रविवार को जितिया पर्व के अवसर पर माताओं ने श्रद्धा और आस्था के साथ निर्जला उपवास रखा. दिन भर बिना जल और आहार ग्रहण किए माताओं ने अपनी संतान की दीर्घायु, सुख और समृद्धि की कामना की. व्रत कर रही महिलाओं ने बताया कि परंपरा में जितिया व्रत का विशेष महत्व है. यह पर्व विशेष रूप से माताओं द्वारा अपने बच्चों के कल्याण, दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है. जिस प्रकार सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए हरितालिका तीज का कठोर उपवास करती हैं, उसी प्रकार माताएं अपने बच्चों की रक्षा और जीवन में आने वाली हर विपत्ति को टालने के लिए निर्जला उपवास रखती हैं. इस व्रत में माताएं डलिया सजाती हैं. दूसरे दिन सजा हुआ डलिया संतान द्वारा खोला जाता है. डलिया खोलने के बाद व्रत कर रही माताएं पारण करती हैं. इस प्रकार जितिया व्रत का समापन होता है. व्रत को लेकर फलों की कीमतों में उछाल जितिया पर्व के चलते फलों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई. जहां नारियल सामान्य दिनों में शहर की मंडी में 25 से 30 रुपये में उपलब्ध होता था, वहीं रविवार को इसकी कीमत लगभग 50 रुपये रही. इसी प्रकार अन्य फलों की कीमतों में भी इजाफा देखा गया. फलों की कीमतों पर एक नजर – केला: 40 रुपये दर्जन – सेब: 120 रुपये किलो – मूली: 40 रुपये किलो – खीर: 60 रुपये किलो – शरीफा: 120 रुपये किलो – बेदाना: 140 रुपये किलो
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