'जमीन हमारी, राज्य हमारा...' MMDR के खिलाफ अमड़ापाड़ा में गरजे हेमलाल मुर्मू

अमड़ापाड़ा में MMDR संशोधन के खिलाफ झामुमो का धरना. विधायक हेमलाल मुर्मू ने खनिज संपदा पर राज्य के अधिकार और राजस्व हिस्सेदारी का मुद्दा उठाते हुए राष्ट्रपति के नाम BDO को ज्ञापन सौंपा.

प्रतिनिधि, अमड़ापाड़ा: MMDR संशोधन विधेयक के विरोध में शनिवार को अमड़ापाड़ा प्रखंड कार्यालय परिसर में झारखंड मुक्ति मोर्चा की प्रखंड कमिटी की ओर से एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया. कार्यक्रम में लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू समेत पार्टी के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं. प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए संशोधन वापस लेने की मांग की गयी.

धरना समाप्त होने के बाद विधायक हेमलाल मुर्मू ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन बीडीओ प्रमोद कुमार गुप्ता को सौंपा.

खनिज संपदा पर राज्य का अधिकार सुरक्षित रखने की मांग

धरना को संबोधित करते हुए विधायक हेमलाल मुर्मू ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है. उन्होंने कहा कि खनिजों के दोहन के लिए राज्य की जमीन और प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल होता है, जबकि विस्थापन और खनन के प्रभावों का सामना स्थानीय लोगों को करना पड़ता है.

उन्होंने कहा कि ऐसे में खनिज संपदा से होने वाली आय और उससे जुड़े अधिकारों में राज्य के हितों को सुरक्षित रखा जाना चाहिए.

विधायक ने कहा, "जमीन हमारी, राज्य हमारा और मालिक दिल्ली में बैठेगा, यह झामुमो होने नहीं देगा." उन्होंने केंद्र सरकार पर झारखंड समेत अन्य राज्यों के प्राकृतिक संसाधनों को लेकर ऐसी नीतियां बनाने का आरोप लगाया, जिनसे उनके अनुसार राज्य और स्थानीय लोगों के हित प्रभावित हो सकते हैं.

राजस्व अधिकार प्रभावित होने का आरोप

हेमलाल मुर्मू ने दावा किया कि खनिजों से झारखंड सरकार को राजस्व और सेस के रूप में 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त होती है. उन्होंने आरोप लगाया कि MMDR संशोधन से राज्य को आर्थिक नुकसान हो सकता है और उसके राजस्व अधिकार प्रभावित हो सकते हैं.

झामुमो नेताओं ने कहा कि खनिज संपदा से होने वाली आय का इस्तेमाल राज्य के विकास और खनन प्रभावित स्थानीय लोगों के हित में होना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले का दिया हवाला

धरना में पार्टी नेताओं ने जुलाई 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया. सुप्रीम कोर्ट ने 8:1 के बहुमत से राज्यों की खनिज-असर वाली भूमि पर कर लगाने की शक्ति को मान्यता दी थी. कोर्ट ने यह भी कहा था कि राज्यों की खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति और खनिज-असर वाली भूमि पर कर लगाने की शक्ति के संवैधानिक आधार अलग-अलग हैं.

2026 के MMDR संशोधन विधेयक में राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों या खनिज-असर वाली भूमि पर कुछ कर, सेस या अन्य लेवी लगाने को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों या प्रतिबंधों के अधीन करने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है. इसको लेकर राज्यों के अधिकार और केंद्र की विधायी शक्ति से जुड़े सवाल भी उठे हैं.

धरना को संबोधित करते विधायक हेमलाल मुर्मू . | Prabhat Khabar Network

बिल वापस नहीं हुआ तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

विधायक हेमलाल मुर्मू ने कहा कि यदि संशोधन वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जायेगा. उन्होंने कहा कि झामुमो खनिज संपदा और राज्य के अधिकारों से जुड़े मुद्दे पर अपना विरोध जारी रखेगा.

उन्होंने किसानों के आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि लंबे संघर्ष के बाद केंद्र सरकार को कृषि कानून वापस लेने पड़े थे. इसी तरह MMDR संशोधन के खिलाफ भी पार्टी आंदोलन जारी रखेगी.

धरना में शामिल महिला कार्यकर्ता. | Prabhat Khabar Network

बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और महिलाएं रहीं मौजूद

धरना कार्यक्रम में केंद्रीय समिति सदस्य निशा शबनम हांसदा, युवा मोर्चा जिला सचिव अमित भगत, रंजीत पंडित, संजीत भगत, संतोष भगत, मंटू भगत समेत बड़ी संख्या में झामुमो कार्यकर्ता और महिलाएं मौजूद रहीं.

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लेखक के बारे में

By रमेश भगत

रमेश भगत प्रभात खबर, पाकुड़ में ब्यूरो चीफ हैं. उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है. 15 वर्षों के पत्रकारिता करियर की शुरुआत दिल्ली में CNEB News Channel से की. इसके बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के ईएमएमसी (EMMC) और डीडी न्यूज में कार्य किया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में उन्हें व्यापक अनुभव है. राजनीति, प्रशासन, अपराध, विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और जनसरोकार सहित हर विधा की खबरों की रिपोर्टिंग और विश्लेषण में उनकी विशेष रुचि है.

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