पावर प्लांट का निर्माण रुका

आठ साल पहले पैनम का हुआ था समझौता पाकुड़ : अरबों रुपये कोयला उत्खनन कर पंजाब इलेक्ट्रीसिटी बोर्ड की आपूर्ति कर प्रतिवर्ष अरबों रुपये कमाने एवं करोड़ों रुपये सरकार को राजस्व देने वाली पैनम कोल परियोजना कोयला उत्खनन के आठ साल बाद भी प्रभावित ग्रामीणों को बिजली सुविधा मुहैया कराने में नाकाम रही है. वर्ष […]

आठ साल पहले पैनम का हुआ था समझौता

पाकुड़ : अरबों रुपये कोयला उत्खनन कर पंजाब इलेक्ट्रीसिटी बोर्ड की आपूर्ति कर प्रतिवर्ष अरबों रुपये कमाने एवं करोड़ों रुपये सरकार को राजस्व देने वाली पैनम कोल परियोजना कोयला उत्खनन के आठ साल बाद भी प्रभावित ग्रामीणों को बिजली सुविधा मुहैया कराने में नाकाम रही है.

वर्ष 2006 में हुए एकरारनामे के मुताबिक पचुवाड़ा सेंट्रल कोल माइंस क्षेत्र के प्रभावित सभी गांवों के विस्थापित लोगों को दिसंबर 2007 तक बिजली मुहैया कराने की जिम्मेदारी पैनम कोल परियोजना ने ली थी और कंपनी के खर्च पर ही विस्थापित परिवारों को बिजली देने का आश्वासन दिया था. लेकिन आज भी नयाकठालडीह गांव के प्रभावित परिवारों को छोड़कर शेष गांवों के ग्रामीणों को बिजली सुविधा तो दूर पावर प्लांट भी पैनम कंपनी स्थापित नहीं कर पायी है.

आश्वासन पर अमल नहीं

पैनम कोल माइंस लिमिटेड पचुड़ा सेंट्रल कोल माइंस एवं विस्थापित लोगों को बीच 30 नवंबर 2006 में हुए समझौते के मुताबिक दिसंबर 2007 तक बिजली मुहैया कराने का लिखित आश्वासन दिया गया था. कंपनी द्वारा जराकी एवं छोटापहाड़पुर में एम्टा पावर एंड कंपनी द्वारा एक सौ मेगावाट का एक पावर प्लांट बैठाने की योजना थी. लेकिन शासन प्रशासन एवं पैनम कंपनी के ढुलमुल रवैये की वजह से पावर प्लांट आज तक नहीं बैठा और प्रभावित ग्रामीण केरोसिन के भरोसे रात गुजारने को आज भी विवश हैं.

बाबूलाल ने दिया था धरना

नवंबर 2012 में सिस्टर वाल्सा जोन के शहादत दिवस के मौके पर प्रभावित परिवारों को समझौते के मुताबिक बिजली, नौकरी, मुआवजा आदि मांगों को दिलाने के लिए झारखंड विकास मोरचा सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था और कंपनी प्रबंधन, तत्कालीन आयुक्त अविनाश कुमार द्वारा धरनार्थियों के बीच वार्ता हुई और सभी बिंदुओं पर त्वरित कार्रवाई करने का आश्वासन भी मिला. लेकिन प्रभावित ग्रामीणों का दुर्भाग्य ही कहा जाये कि न तो पावर प्लांट का निर्माण हो पाया और न ही उन्हें बिजली सुविधा मिल पायी.

प्रभावित रयैतों के मुताबिक पावर प्लांट बैठाने के लिए जिस जमीन को अधिग्रहण करने को लेकर आमसभा की गयी थी उसमें भी कंपनी के प्रतिनिधियों द्वारा ग्रामीणों को झांसे में रखा गया. जराकी के ग्राम प्रधान रंजन हेंब्रम ने बताया कि पावर प्लांट लगाने के लिए 560 बीघा जमीन अधिग्रहण किया गया और अब तक रयैतों को न तो मुआवजा और न ही नौकरी दी गयी. श्री हेंब्रम ने बताया कि धोखा देकर ग्रामीणों की जमीन पैनम कंपनी द्वारा ली गयी.

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