उपेक्षित हैं पाकुड़ के किसान

जनप्रतिनिधियों ने नहीं दिया कभी ध्यान, बंजर भूमि पर नहीं आयी हरियाली रामप्रसाद सिन्हा पाकुड़ : पिछड़े जिले का दंश झेल रहे जिले के किसान अलग राज्य बनने के बाद भी राजनीतिक उपेक्षा के शिकार हुए है. यहां के किसानों को सिंचाई सुविधा मुहैया कराने का जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार आश्वासन दिया गया, परंतु आज […]

जनप्रतिनिधियों ने नहीं दिया कभी ध्यान, बंजर भूमि पर नहीं आयी हरियाली

रामप्रसाद सिन्हा

पाकुड़ : पिछड़े जिले का दंश झेल रहे जिले के किसान अलग राज्य बनने के बाद भी राजनीतिक उपेक्षा के शिकार हुए है. यहां के किसानों को सिंचाई सुविधा मुहैया कराने का जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार आश्वासन दिया गया, परंतु आज भी किसान सिंचाई के मामले में वर्षा पर निर्भर है.

संताल परगना प्रमंडल से अलग राज्य बनने के बाद तीन कृषि मंत्री बने लेकिन किसानों की माली हालत अब तक नहीं बदली. मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना से बने सिंचाई कूप एवं तालाब भी गरमी के मौसम में किसानों के खेतों में सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराने के मामले में विफल ही साबित हुआ है. 16वीं लोकसभा चुनाव में सभी दलों के प्रत्याशी चुनावी बैतरनी पार करने की जुगाड़ में जुटे हैं. देश के सबसे बड़े महापर्व के मौके पर राजमहल संसदीय क्षेत्र अंतर्गत पड़ने वाले पाकुड़ जिले के किसान अपने भविष्य को लेकर आज भी चिंतित है.

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