विभाग व संवेदक की लापरवाही से पेयजलापूर्ति योजना लंबित
पाकुड़ : जिले की महत्वपूर्ण शहरी जलापूर्ति योजना दो साल बीतने के बाद भी अब तक चालू नहीं हो पायी है. कार्यावधि समाप्त होने के बाद भी न तो जलमीनार और न ही जल शुद्धिकरण यंत्र का निर्माण कार्य अब तक पूरा हो पाया है. योजना का ठेका मेसर्स दोसियन भोलिया वाटर सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड अहमदाबाद को मिला है और इस कंपनी ने अब तक किये गये कार्यो के एवज में सात करोड़ 58 लाख 70 हजार 848 रुपये का भुगतान भी विभाग से ले लिया है.
नगर विकास विभाग की उक्त राशि से शहरी जलापूर्ति योजना का कार्य पेयजल स्वच्छता विभाग को दिया गया. संवेदक ने 22 मार्च 2012 को उक्त योजना का एकरारनामा किया और 22 मार्च 2014 तक इसे पूरा किया जाना था परंतु योजना के संवेदक द्वारा किये जा रहे धीमी कार्य के कारण योजना पूरी नहीं हो पायी. योजना की धीमी रफ्तार की वजह से जलमीनार का काम पूर्ण नहीं हो पाया है. 65 किलोमीटर पाइप लाइन विस्तारीकरण किया जाना था और अब तक मात्र 30 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाये गये हैं. रेलवे कॉलोनी में टावर निर्माण के लिए रेलवे द्वारा जमीन के अधिग्रहण को लेकर अनापति प्रमाण पत्र नहीं दिये जाने की वजह से अब तक टावर का निर्माण कार्य भी चालू नहीं हो पाया है. हालांकि रेलवे से एनओसी प्राप्त करने के लिए तत्कालीन डीसी डॉ सुनील कुमार सिंह एवं कार्यपालक अभियंता शिवजी बैठा द्वारा रेलवे के महाप्रबंधक से वार्ता भी की गयी परंतु नतीजा अब तक ढाक के तीन पात ही निकले.
एनओसी प्राप्त करने एवं योजना में तेजी के लिए क्षेत्र के न तो सांसद और न ही विधायक द्वारा कोई दिलचस्पी दिखाई है. जिसका नतीजा है कि गरमी के मौसम में कॉलेज रोड, पाकुड़ राज हाई स्कूल रोड, भगतपाड़ा, ग्वालपाड़ा, श्यामनगर आदि दर्जनों मुहल्लों के लोगों को डीप बोरिंग एवं चापानल पर निर्भर रहना पड़ रहा है. संवेदक को कार्य में तेजी लाने के लिए कई बार नोटिस दिया गया परंतु इसका कोई लाभ नहीं मिला. उल्लेखनीय है कि योजना के पूरा होने से शहरी क्षेत्र के लगभग 70 हजार लोगों को पेयजल की समस्या से निजात मिलेगी. योजना का शिलान्यास तत्कालीन राज्य के उपमुख्यमंत्री सह पेयजल स्वच्छता विभाग के मंत्री हेमंत सोरेन ने किया था.
क्या कहना है विभाग का
शहरी पेयजलापूर्ति योजना को समय पर पूरा कराने के लिए विभाग द्वारा प्रयास किया गया है. शीघ्र उक्त योजना पूरा हो इसके लिए संवेदक को भी कई बार नोटिस दिया गया. रेलवे द्वारा एनओसी नहीं दिये जाने के कारण भी इसके क्रियान्वयन में विलंब हुआ है. उक्त बातें पेयजल स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता रासबिहारी सिंह ने कही.
