कुड़ू़ जिला प्रशासन के निर्देश पर भवन निर्माण विभाग ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के पुराने भवनों की जांच कर उन्हें कंडम घोषित किया था. विभाग ने साफ तौर पर कहा कि ये भवन अब उपयोग के लायक नहीं हैं और किसी भी समय हादसा हो सकता है. बावजूद इसके तीन महीने बीत जाने के बाद भी इन भवनों को न तो खाली कराया गया है और न ही ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू हुई है. तीन दिन पहले ही सीएचसी परिसर में एक भवन की छत का हिस्सा गिर गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया. परिसर में पुराने भवनों की हालत बेहद खास्ता है. स्थापना काल में बने ओपीडी, कार्यालय और कर्मियों के आवासीय भवन अब दीवारों में दरार, गिरता प्लास्टर और टपकती छत जैसी समस्याओं से भरे हैं, जो कर्मचारियों और आने-जाने वाले मरीजों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं. जर्जर भवनों की स्थिति गंभीर : डॉ सुलामी होरो : कुड़ू सीएचसी प्रभारी डॉ सुलामी होरो ने बताया कि कुछ हाल ही में बने भवनों को छोड़कर लगभग सभी पुराने भवनों को कंडम घोषित किया गया है. कार्यालय को नये भवन में शिफ्ट कर दिया गया है, और जल्द ही बाकी भवनों को भी खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की जायेगी. उन्होंने कहा कि जर्जर भवनों की स्थिति गंभीर है और इनके खाली नहीं होने से किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है. प्रभारी को निर्देश, हादसा होने पर तय होगी जिम्मेदारी : सीओ सीओ सह प्रभारी बीडीओ संतोष उरांव ने स्पष्ट किया कि जब भवन निर्माण विभाग ने भवनों को कंडम घोषित कर दिया है, तो उन्हें तुरंत खाली कराना अनिवार्य है. अगर कोई हादसा होता है तो जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को एक सप्ताह के भीतर सभी जर्जर भवन खाली कराने का कड़ा निर्देश दिया है. ऐसा नहीं होने पर जिला प्रशासन को रिपोर्ट भेज कर सख्त कार्रवाई की जायेगी. जिला प्रशासन की तरफ से यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि सीएचसी परिसर में कर्मियों और मरीजों की सुरक्षा बनी रहे और किसी भी अप्रत्याशित हादसे को टाला जा सके.
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