समस्याओं के भंवर में फंसे लोहरदगा जिला का स्थापना दिवस आज

समस्याओं के भंवर में फंसे लोहरदगा जिला का स्थापना दिवस आज

लोहरदगा़ जिला का 43वां स्थापना दिवस आज 17 मई को धूमधाम से मनाया जायेगा. जिला प्रशासन द्वारा विकास मेला व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गये हैं. 17 मई 1983 को गठित इस जिले के लोगों को उम्मीद थी कि लोहरदगा का उत्तरोत्तर विकास होगा, लेकिन जनता की आकांक्षाएं धरी रह गयीं. विकास योजनाओं में लूट मची है. असफल प्रयोगों की भेंट चढ़ा जिला, बुनियादी सुविधाओं का अभाव : यह जिला प्रशासनिक प्रयोगों की भेंट चढ़ गया. पूर्व के उपायुक्तों ने यहां सूर्यमुखी व नाशपाती की खेती जैसे नये प्रयोगों में करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिये, जो असफल रहे. आज भी किसान एक कोल्ड स्टोरेज के लिए परेशान हैं. जिला बनने के चार दशक बाद भी सुव्यवस्थित बस पड़ाव नहीं बन सका. पेयजल की भारी किल्लत है और केंद्र की नल-जल योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है. सड़कों की हालत जर्जर है और कई गांवों में बिजली तक नहीं पहुंची है. सरकारी महकमों में अराजकता व मानव संसाधन की कमी : प्रशासनिक अंकुश नहीं होने से पंचायत से लेकर जिला मुख्यालय तक अराजकता का माहौल है. स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षकों की घोर कमी है. अधिकारियों के पद रिक्त पड़े हैं. शहरी क्षेत्र में नगर परिषद जन सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है. चुनाव के समय बड़े दावे करने वाले जनप्रतिनिधि जीत के बाद वादे भूल जाते हैं. कहने को तो लोहरदगा में बड़े-बड़े नेता हैं लेकिन उनके कोई भी उल्लेखनीय कार्य यहां नजर नहीं आते हैं. गांवों से जवानी गायब, तारणहार का इंतजार : बॉक्साइट नगरी होने के बावजूद यहां बेरोजगारों की फौज खड़ी है, जिससे युवा नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं. उच्च शिक्षा व रोजगार के अभाव में युवाओं का पलायन जारी है, गांवों से जवानी गायब है, जिससे गांवों में सिर्फ बूढ़े और लाचार लोग बचे हैं. समस्याओं से घिरे लोहरदगा को आज किसी ऐसे तारणहार का इंतजार है, जो इसका वास्तविक विकास कर सके. जनता यह सोचने को विवश है कि आखिर फरियाद करें तो कहां करें.

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SHAILESH AMBASHTHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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