सबसे अधिक परेशानी वनांचल क्षेत्रों के लोगों को हो रही है. पर्याप्त गर्म कपड़े न होने के कारण वे रातें आग तापकर गुजारते हैं. ग्रामीण इलाकों में अब कुछ गर्म कपड़े उपलब्ध हैं, लेकिन कड़ाके की ठंड के लिए वे पर्याप्त नहीं हैं. इन लोगों को अपने पालतू मवेशियों को बचाने की चिंता भी सताती है. नदी-नालों और जंगलों से बहती ठंडी हवाएं उनकी मुश्किलें और बढ़ा देती हैं.
रोज कमाने-खाने वाले तबके पर ठंड का असर सबसे ज्यादा है. वाहनों में काम करने वाले ड्राइवर, खलासी और मजदूरों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. ठेला-खोमचा चलाने वाले लोग भी परेशान हैं, क्योंकि सूरज ढलते ही राहगीरों की संख्या घट जाती है और बिक्री कम हो जाती है. इससे उनके परिवार चलाने में दिक्कतें आ रही हैं.देसी उपचार पर निर्भर नहीं रहें
चिकित्सकों ने लोगों को ठंड से बचाव के लिए विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी है. उन्होंने कहा है कि गर्म खाना और पानी का सेवन करें, बिना काम के घर से बाहर न निकलें और बाहर निकलते समय पर्याप्त कपड़े पहनें. यदि किसी को ठंड लग जाये तो देसी उपचार पर निर्भर न रहें, बल्कि तुरंत अस्पताल जाकर इलाज करायें.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
