धधक रहे किस्को और पेशरार के जंगल, दो माह से आग का तांडव

धधक रहे किस्को और पेशरार के जंगल, दो माह से आग का तांडव

किस्को़ किस्को और पेशरार प्रखंड के जंगलों में पिछले दो महीने से आग का तांडव जारी है. महुआ चुनने के लिए ग्रामीणों द्वारा सूखी पत्तियों में लगायी गयी आग ने विकराल रूप ले लिया है. पेशरार, बगड़ू, पाखर और बानपुर के वनक्षेत्र धू-धू कर जल रहे हैं, जिससे बेशकीमती वन संपदा राख हो रही है. चिलचिलाती गर्मी और जंगल की आग के कारण तापमान में भारी वृद्धि हुई है, जिससे प्रखंड कर्मियों और राहगीरों का जीना मुहाल हो गया है. वन्यजीवों का पलायन और घटता घनत्व : जंगल जलने के कारण जंगली जानवर जान बचाने के लिए रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं. ग्रामीणों के अनुसार, पिछले वर्षों में आग के कारण ही हाथियों ने हेन्देहास क्षेत्र में कई घरों को ध्वस्त किया था. स्थानीय निवासी मनोज महली व अन्य ने बताया कि आग और लकड़ी माफियाओं के कारण वनों का घनत्व तेजी से घट रहा है. नये पौधे उगने से पहले ही जल जा रहे हैं, जिससे वनों का अस्तित्व खतरे में है. जागरूकता कार्यक्रम बेअसर, विभाग लाचार : वन विभाग आग बुझाने और जागरूकता का दावा तो कर रहा है, लेकिन धरातल पर ये प्रयास विफल साबित हो रहे हैं. विभाग का कहना है कि महुआ चुनने वालों को पकड़ना मुश्किल हो रहा है. डीएफओ अभिषेक कुमार ने कहा कि सूचना मिलते ही टीम भेजी जाती है, पर जब तक ग्रामीण खुद जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, नियंत्रण कठिन है. इधर, लोगों का सवाल है कि यदि विभाग ठोस पहल नहीं करेगा, तो इन वनों को कौन बचायेगा? स्थायी नियंत्रण नहीं होने से प्रतिदिन लाखों की क्षति हो रही है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Shailesh ambashtha

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें
Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >