किस्को़ प्रखंड की नवाडीह पंचायत अंतर्गत निनी गांव में आंगनबाड़ी केंद्र का भवन सफेद हाथी साबित हो रहा है. लगभग 30 वर्ष पुराना यह भवन इतना जर्जर हो चुका है कि यहां बच्चों को बिठाना खतरे से खाली नहीं है. दीवारों में दरारें आ गयीं हैं और छत का प्लास्टर अक्सर टूटकर गिरता रहता है. हादसे के डर से फिलहाल केंद्र का संचालन किराये के मकान में किया जा रहा है, लेकिन जर्जर ढांचा अब भी बड़ी मुसीबत बना हुआ है. जान जोखिम में डाल रहे मासूम : ग्रामीणों का कहना है कि भवन के पास अक्सर बच्चे खेलते रहते हैं. चूंकि यह पूरी तरह जर्जर है, इसलिए इसके कभी भी गिरने की आशंका बनी रहती है. पूर्व में भी यहां छोटी-मोटी घटनाएं हो चुकी हैं. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस अनुपयोगी और खतरनाक ढांचे को जल्द से जल्द ध्वस्त किया जाये, ताकि किसी बड़ी जान-माल की हानि को रोका जा सके. धार्मिक स्थल के पास है भवन : उल्लेखनीय है कि इस भवन के समीप आदिवासी सरना समाज का धार्मिक स्थल है, जहां साप्ताहिक पूजा और बैठकें होती हैं. ग्रामीणों ने उक्त स्थल पर कल्याण विभाग से ””””धूमकुड़िया भवन”””” निर्माण का प्रस्ताव भी भेजा है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि भविष्य में नये आंगनबाड़ी केंद्र की स्वीकृति मिलती है, तो वे गांव में दूसरी जगह जमीन उपलब्ध कराने को तैयार हैं. फिलहाल, उनकी प्राथमिकता इस जर्जर भवन से मुक्ति पाने की है.
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