किस्को के खरकी पंचायत में सड़कें बदहाल, विकास सिर्फ कागजों में सीमित

किस्को के खरकी पंचायत में सड़कें बदहाल, विकास सिर्फ कागजों में सीमित

किस्को़ किस्को प्रखंड क्षेत्र के खरकी पंचायत के सभी गांवों की सड़कें बदहाल हैं. पंचायती राज व्यवस्था आने के बाद भी ग्रामीणों के जीवन में विकास की रोशनी दूर-दूर तक नहीं दिख रही. ग्रामीण जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से वर्षों से गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं, लेकिन हालात जस के तस बनी हुई है. पंचायत क्षेत्र में विकास के दावे कागजों तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर पूरी तरह फेल नजर आते हैं. गांवों तक पहुंचना बेहद मुश्किल है. किस्को से बाला टोली होकर कोचा, कसियाडीह, ऊपर कोचा, बांध टोली, बरनाग, करम टोली, सेमरडीह, डटमा, बानपुर, बंजारी आदि मार्गों पर बड़े-बड़े गड्ढे, उभरे पत्थर और वर्षों से जर्जर पुल आने-जाने को जोखिम भरा बनाते हैं. स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को किस्को पहुंचने में भारी परेशानी उठानी पड़ती है. कोचा पंचायत भवन के पास टूटा पुल और कोचा–बरनाग मार्ग पर खराब सड़क दुर्घटना को आमंत्रित कर रहा है. कई सड़कें वर्षों से अधूरी पड़ी हैं. विधायक के आदेश के बाद भी सेमरडीह–बानपुर सड़क बंद पड़ी है. विधायक के आगमन से पहले शुरू किया गया काम दो दिन बाद फिर ठप हो गया. स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता ने हालात और बिगाड़ दिये हैं. पंचायत की जलमीनारें बेकार पड़ी हैं. जल नल योजना भगवान भरोसे चल रही है. नालियों के अभाव में गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है. ग्रामीण सकील खान, कुंवर तुरी, अजीज साह, परवेज साह, प्रमोद उरांव, रामदेव भगत और सोहराई भगत कहते हैं कि लोगों ने विकास के सपने देखे थे, लेकिन सपने पूरे नहीं हुए. करीब छह हजार आबादी वाली इस पंचायत में मुखिया चांदमनी उरांव लगातार तीन बार निर्वाचित हुई हैं, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि समस्याओं के समाधान में कभी गंभीरता नहीं दिखायी गयी. पंचायत में दलाल और बिचौलियों का बोलबाला है, जिससे हालात और बदतर हो गये हैं.

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By SHAILESH AMBASHTHA

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