.रेत की लूट से रेल सेवा ठप, लोहरदगा भुगत रहा खामियाजा
जिले में कोयल नदी से हो रहे बालू के अवैध उठाव ने अब गंभीर संकट खड़ा कर दिया है.
रात भर ट्रैक्टरों से होती है ढुलाई, रातभर सो नहीं पाती है जनता लोहरदगा. जिले में कोयल नदी से हो रहे बालू के अवैध उठाव ने अब गंभीर संकट खड़ा कर दिया है. अवैध खनन के कारण कोयल नदी पर बना रेलवे पुल क्षतिग्रस्त हो गया है, जिसके बाद लोहरदगा रेलवे स्टेशन से ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया है. रेलवे सूत्रों के अनुसार पुल की मरम्मत और दुरुस्तीकरण में करीब एक वर्ष का समय लग सकता है. इससे हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले की जड़ अवैध बालू खनन होने के बावजूद जिला प्रशासन, खनन विभाग और पुलिस विभाग आंख मूंदे बैठे हैं. जिले में रातभर ट्रैक्टरों से बालू की अवैध ढुलाई धड़ल्ले से जारी है. ट्रैक्टरों की कर्कश आवाज और गड़गड़ाहट से शहरवासी रातभर चैन की नींद नहीं सो पा रहे हैं. अवैध बालू ढुलाई से जहां सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं बिना अनुमति बालू उठाव कानूनन अपराध होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है. खनन विभाग पर आरोप है कि वह सिर्फ बयानबाजी तक सीमित है. कभी-कभार अखबारों में खबर प्रकाशित होने पर एक-दो ट्रैक्टर जब्त कर थाने को सौंप दिया जाता है, जिन्हें मामूली जुर्माना लेकर छोड़ दिया जाता है. इसके बाद वहीं ट्रैक्टर फिर से अवैध ढुलाई में जुट जाते हैं. इस बेलगाम अवैध कारोबार में माफिया बेखौफ होकर लाखों रुपये कमा रहे हैं, जबकि आम जनता खुद को ठगा और असहाय महसूस कर रही है. लोगों का कहना है कि आखिर वे अपनी फरियाद किससे करें. लाचार नागरिकों ने प्रशासन से गुहार लगायी है कि यदि बालू चोरी पर रोक नहीं लगायी जा सकती, तो कम से कम रात में ट्रैक्टरों की रफ्तार और आवाज पर नियंत्रण कराया जाये, ताकि लोग शांति से सो सके.
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