किस्को-पेशरार
. किस्को एवं पेशरार प्रखंड के ग्रामीण व नक्सल प्रभावित क्षेत्र के मजदूरों को रोजगार देने के लिए चल रही मनरेगा योजना के तहत पिछले दो माह से मजदूरों को मजदूरी नहीं मिली है.इस कारण मजदूरों की हालत खराब है. नक्सल प्रभावित क्षेत्र में मुख्य धारा से जोड़ने के उद्देश्य से लोगो को काम करायी जा रही है.परंतु काम कर दो महीने से अधिक समय से मजदूरी भुगतान नहीं होने से लोग भटककर या तो पलायन को विवश हैं.या किसी दूसरे रास्ते चुनने को,मनरेगा में काम कर लाभुक दर दर के ठोकर खाने को विवश हैं.मनरेगा अधिनियम के तहत 15 दिन में भुगतान करने का नियम है. लेकिन किस्को व पेशरार प्रखंड में नियम कानून की धज्जियां उड़ायी जा रही है. मजदूरी का भुगतान कब होगा, इसका कोई पता नहीं है. कार्य का भुगतान नहीं होने से योजना में ठेकेदारी को बढ़ावा मिल रहा है. मनरेगा मेठ या अन्य संलिप्त लोग अपनी पूंजी लगाकर जैसे-तैसे कार्य करवा कर अपने चहेते मजदूरों के नाम डिमांड कटा खानापूर्ति कर रहे हैं. किस्को व पेशरार प्रखण्ड के 14 पंचायतों में 3000 से अधिक योजनाएं संचालित हैं. अधिकांश योजनाएं टीसीबी, डोभा, बिरसा हरित योजना, मेड़बंदी, सिंचाई कूप व से जुड़ी हुई हैं. मजदूर काम कर पैसा के लिए बैंक व प्रखण्ड मुख्यालय का चक्कर लगाते थक चुके हैं. बैंकों में भी प्रतिदिन भीड़ देखने को मिलती है. प्रखण्ड में मनरेगा मजदूर प्रखण्ड कर्मियों व अधिकारियों से उधार में पैसा की मांग जीवन यापन के लिए कर रहे हैं,लेकिन वहां भी उन्हें पैसा नहीं दी जा रही है. इससे मजदूरों के समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गयी है. पंचायत कर्मियों द्वारा एक सप्ताह में पैसा आयेगा,बोल कर काम कराया जाता है. वहीं मनरेगा मैटेरियल पेमेंट एक वर्ष से नहीं हुई है, जिससे मनरेगा में काम कराना मुश्किल हो रहा है. देवदरिया मुखिया कामिल तोपनो का कहना है कि मनरेगा योजना में जैसे-तैसे उधार लेकर काम करायी गयी है. पेमेंट नहीं होने से मनरेगा कार्य प्रभावित हो रही है. वहीं राशन पानी की व्यवस्था के लिए मजदूर भी परेशान है. पेमेंट नहीं होने के कारण पंचायत व बैंकों का चक्कर काट रहे हैं. जानकारी के अनुसार प्रखंड कार्यालय से एफटीओ कर दिया गया है, लेकिन राज्य व केंद्र सरकार द्वारा भुगतान नहीं किया जा रहा है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
