लोहरदगा. अपनी लंबित मांगों को लेकर भारतीय ग्रामीण डाक कर्मचारी संघ के बैनर तले बुधवार को मुख्य डाकघर प्रांगण में एक दिवसीय धरना दिया गया. इस दौरान डाक सेवकों ने केंद्र सरकार के विरुद्ध जम कर नारेबाजी की. धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आठवें केंद्रीय वेतन आयोग में ग्रामीण डाक सेवकों (जीडीएस) को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाये. यदि ऐसा संभव न हो, तो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में जीडीएस कैडर के लिए अलग उच्च स्तरीय वेतन आयोग का गठन हो. संघ ने चेतावनी दी कि कर्मचारियों का उत्पीड़न, वेतन रोकना और बिना ठोस कारण ड्यूटी से हटाना बंद किया जाये. साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में शाखा डाकघरों को स्थानांतरित करने और पदों को समाप्त करने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गयी. मौके पर सचिव राधेश्याम प्रजापति, अनिल कुमार भारती, मानवर अंसारी, अरविंद ठाकुर, मुसेब अंसारी, दशरथ राम, शुभम कुमार, दयानंद कुमार, राजदीप मिश्र, विवेक भगत, नसीमा खातून, सुचिता देवी, मंगल देव उरांव समेत दर्जनों कर्मी उपस्थित थे. यूजीसी बिल के समर्थन में उतरा पड़हा समाज
कुड़ू. प्रखंड में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा जारी यूजीसी बिल के समर्थन में अनुसूचित जाति एवं जनजाति समाज आगे आया है. बुधवार को पारंपरिक स्वशासन पड़हा व्यवस्था के तहत जतरू उरांव की अध्यक्षता में एक बैठक हुई. इसमें वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि केंद्र सरकार ने भेदभाव विरोधी प्रावधानों को सुदृढ़ कर देश के लाखों युवाओं को केंद्रीय विद्यालयों से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों तक समानता का अधिकार दिया है. वक्ताओं ने चिंता जताते हुए कहा कि जो समाज कल तक सरकार के साथ था, उसका विरोध में आना दर्शाता है कि देश अभी भी भेदभाव की मानसिकता से ग्रसित है. इस दौरान सामाजिक एकजुटता और युवाओं के शैक्षिक अधिकारों पर विस्तार से चर्चा की गयी. बैठक में विभिन्न समाज के प्रबुद्ध लोग शामिल थे.
