लोहरदगा़ जिला परिषद सभागार में सुखाड़ आकस्मिक कार्य योजना 2026-27 को लेकर कृषि सह संबद्ध विभागों के जिला व प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों की बैठक हुई. यह बैठक राज्य स्तरीय खरीफ कर्मशाला में कृषि मंत्री के मिले निर्देशों के आलोक में आयोजित की गयी. इसमें सुखाड़ की स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न विभागों ने विस्तृत कार्य योजना तैयार की गयी. फसल विविधीकरण व कम पानी वाली फसलों पर जोर : कृषि विभाग द्वारा उच्च भूमि (टांड़) और मध्य भूमि (कनारी) में फसल विविधीकरण पर विशेष जोर दिया गया. इसके तहत किसानों को कम अवधि की अरहर, उड़द, मूंग, सरगुजा, कुल्थी, रागी, ज्वार और बाजरा जैसी आकस्मिक फसलों के चयन के लिए जागरूक करने की बात कही गयी. मौके पर इसके लिए आवश्यक बीजों का आकलन भी किया गया. इसके अलावा मृदा नमी संरक्षण के लिए मल्चिंग, आवरण फसल, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली और खेतों में ट्रेंचिंग बनाने पर चर्चा हुई. पशुपालन, मत्स्य व केवीके ने दिये महत्वपूर्ण सुझाव : जिला पशुपालन पदाधिकारी ने चारा फसलों, सामुदायिक पशु आश्रय, चलंत पशु चिकित्सा वैन और टीकाकरण पर ध्यान केंद्रित करने को कहा. मत्स्य पदाधिकारी ने कम पानी में जीवित रहने वाली मछली की प्रजातियों के चुनाव का सुझाव दिया. वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र (किस्को) के वरीय वैज्ञानिक ने मध्यम भूमि में कम अवधि की फसलों और धान के लिए डीएसआर (सीधी बुआई) विधि अपनाने की सलाह दी. बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी, सहकारिता, भूमि संरक्षण, उद्यान पदाधिकारी, डीडीएम नाबार्ड, एलडीएम सहित सभी प्रखंडों के बीएओ, बीटीएम, एटीएम और जनसेवक मौजूद थे.
कम अवधि के मोटे अनाज और दलहन की खेती पर जोर
कम अवधि के मोटे अनाज और दलहन की खेती पर जोर
