प्राकृतिक छटा के बीच श्रद्धालुओं ने उठाया मकर संक्रांति का आनंद

प्राकृतिक छटा के बीच श्रद्धालुओं ने उठाया मकर संक्रांति का आनंद

By SHAILESH AMBASHTHA | January 15, 2026 9:06 PM

सेन्हा़ प्रखंड की चितरी पंचायत अंतर्गत चितरी-डांडू स्थित दक्षिण कोयल नदी तट पर गुरुवार को मकर संक्रांति के पावन अवसर पर ऐतिहासिक ””””चितरी घाघ मेला”””” का भव्य आयोजन हुआ. वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के तहत आयोजित मेले में सनातनी श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा. कड़ाके की ठंड के बावजूद सूर्योदय के साथ ही भक्तों ने कोयल नदी में आस्था की डुबकी लगायी और सूर्य देव व भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की. अंतर्राज्यीय स्वरूप में दिखा मेला : चितरी घाघ मेला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यहां लोहरदगा के अलावा रांची, गुमला, लातेहार समेत राज्य के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु पहुंचे. नदी के बीच स्थित अलग-अलग आकृति की विशाल चट्टानें और जलप्रपात जैसी प्राकृतिक छटा श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रही. पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने अपने परिजनों के साथ नदी तट पर ही चूड़ा-दही, गुड़, तिलकुट और खिचड़ी का स्वाद लिया. कई परिवारों ने इस मौके पर पिकनिक का भी भरपूर लुत्फ उठाया. सुरक्षा और सुविधा के थे पुख्ता इंतजाम : मेला परिसर में शांति व्यवस्था बनाये रखने और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए सेन्हा प्रखंड प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद रहा. गहरे पानी वाले क्षेत्रों में बैरिकेडिंग की गयी थी और श्रद्धालुओं के लिए विशेष गाइडलाइन जारी की गयी थी. प्रखंड प्रशासन के सौजन्य से मेला स्थल पर मेडिकल टीम की भी तैनाती थी. मेला आयोजन समिति के सदस्यों ने सुबह से ही आगंतुकों की सुविधा और भीड़ नियंत्रण में सक्रिय भूमिका निभायी. बाजार में रही रौनक : मेले में तिलकुट, खिलौने, मिठाई, गन्ने का जूस, चाट-चाउमीन की दुकानों पर दिनभर ग्राहकों की भीड़ लगी रही. बच्चों ने झूलों का आनंद लिया, वहीं बुजुर्गों और महिलाओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में बढ़-चढ़कर भाग लिया. ऐतिहासिक चितरी घाघ मेला एक बार फिर अपनी धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता की विरासत को सहेजने में सफल रहा.

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