गडरपो पंचायत में आज भी पक्की सड़क नहीं

भंडरा-लोहरदगा : किसी भी क्षेत्र का विकास का आइना उस क्षेत्र की सड़क को माना जाता है. विकास की गति वहां या उस क्षेत्र की सड़कों पर निर्भर होती है. बगैर अच्छी सड़क के क्षेत्र के विकास की कल्पना बेकार साबित होता है. भंडरा प्रखंड के गडरपो पंचायत आजादी के आठ दशक बाद भी पक्की […]

भंडरा-लोहरदगा : किसी भी क्षेत्र का विकास का आइना उस क्षेत्र की सड़क को माना जाता है. विकास की गति वहां या उस क्षेत्र की सड़कों पर निर्भर होती है. बगैर अच्छी सड़क के क्षेत्र के विकास की कल्पना बेकार साबित होता है. भंडरा प्रखंड के गडरपो पंचायत आजादी के आठ दशक बाद भी पक्की सड़क से नहीं जोड़ा गया है. गडरपो पंचायत की सभी सड़के बदतर स्थिति में हैं.
प्रखंड मुख्यालय से गडरपो पंचायत मुख्यालय की दूरी दस किमी है. भंडरा से मुरली पोखर तक दो किमी सड़क पक्कीकरण की गयी है.
इस सड़क की स्थिति जर्जर है. यहां लोग सड़क छोड़ कर पगडंडी में चलते हैं. बेडो-भंडरा हाइवे सड़क से पझरी गांव होते हुए सेमरा गडरपो तक जानेवाली सड़क में ग्रेड वन बीस वर्ष पहले किया गया है.
इस सड़क में नुकीले पत्थर निकल गये हैं. जमगांई से गडरपो तक की आठ किमी सड़क पर भी सभी जगह पत्थर निकल गये हैं. गडरपो पंचायत से पोड़हा, गडरपो से लालपुर तेतरटोली सभी सड़क जर्जर है. यहां के निवासी बबलू गुप्ता, हसीम अंसारी, राधेश्याम साहू, दिलीप गुप्ता सहित अन्य लोग कहते हैं कि इस पंचायत में सड़क की स्थिति सुधारने में जनप्रतिनिधि उदासीन हैं.
किसानों को हो रहा नुकसान : पंचायत का धनामुंजी, सेमरा, तिलसीरी बागवानी के क्षेत्र में जिला में अग्रणी है.
धनामुंजी गांव का आम क्षेत्र में प्रसिद्ध हो चुका है. धनामुंजी गांव निवासी दानियल लकड़ा सरकार का सरेंडर नीति के तहत आत्मसमर्पण किया उग्रवादी एवं गांव के अन्य निवासी बताते हैं कि क्षेत्र के सड़क के कारण आम के व्यापारी गांव तक नहीं आते हैं. उपज को बाजार तक ले जाने में परेशानी होती है. सड़क को दुरूस्त कर यहां के किसानों को ज्यादा लाभ पहुंचाया जा सकता है.

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