लरका आंदोलन की जयंती पर विशेष
कुडू (लोहरदगा). लरका आंदोलन के नेतृत्वकर्ता अमर शहीद वीर बुधु भगत, इनके दो पुत्र हलधर-गिरधर भगत, बहन रूनिया-झुनिया एवं सात आंदोलनकारियों ने अंगरेजी सेना को परेशान कर रखा था. अंगरेजी सेना ने कड़ी मशक्कत के बाद सातों आंदोलनकारियों को पकड़ने में कामयाब हुई थी. अंगरेजी सेना ने बरगद के दो पेड़ों से रस्सी में बांधते हुए गला काट दिया था. टिको पोखराटोली में खून की धारा बहने लगी थी.
क्या हुआ था दो फरवरी 1832 को
लरका आंदोलन के नेतृत्वकर्ताओं ने अंगरेजी सेना को परेशान कर दिया था. एक फरवरी 1832 की रात्रि को सातों आंदोलनकारी टिको पोखराटोली से सटे बगीचा में रणनीति बना रहे थे. रात्रि में अंगरेजी सेना ने सातों आंदोलनकारियों को धर-दबोचा. दो फरवरी को टिको पोखराटोली के समीप स्थित जोड़ाबर में सातों को बांध कर हत्या कर दी. शहीदों की याद में प्रत्येक वर्ष दो फरवरी को टिको पोखराटोली में श्रद्धांजलि समारोह सह मेला का आयोजन किया जाता है.
कार्यक्रम कि तैयारी पूरी
शहीद वीर बुधू भगत का श्रद्धांजलि समारोह की तैयारी पूरी कर ली गयी है. कार्यक्रम में सुबह वीर बुधु भगत के बस स्टैंड स्थित प्रतिमा पर पूजा-अर्चना होगी. इसके बाद टिको पोखराटोली स्थित शहीदों के समाधि स्थल पर पूजा-अर्चना एवं श्रद्धा सुमन अर्पित किया जायेगा. हलधर-गिरधर स्मारक समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में कई मेहमानों को आमंत्रित किया गया है.
