तारणहार की बाट जोह रहा है नंदिनी डैम

करोड़ों की लागत से बना डैम आज किसी काम का नहीं लोहरदगा : जिले का प्रसिद्ध नंदिनी डैम आज किसी तारणहार क ी बाट जोह रहा है. नंदनी जलाशय का निर्माण संयुक्त बिहार के समय 1984-85 में करोड़ों रुपये की लागत से कराया गया था. इसके निर्माण के पीछे सरकार की मंशा क्षेत्र को लोगों […]

करोड़ों की लागत से बना डैम आज किसी काम का नहीं
लोहरदगा : जिले का प्रसिद्ध नंदिनी डैम आज किसी तारणहार क ी बाट जोह रहा है. नंदनी जलाशय का निर्माण संयुक्त बिहार के समय 1984-85 में करोड़ों रुपये की लागत से कराया गया था. इसके निर्माण के पीछे सरकार की मंशा क्षेत्र को लोगों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना था.
जिससे क्षेत्र से पलायन रूके तथा लोग कृषि कार्य कर आत्मनिर्भर हो सकें. नंदनी जलाशय के निर्माण के बाद इससे तीन नहरें निकाली गयी.
मुख्य नहर से अकाशी, पचागांई, नरौली, अंबवा, खंडा, उत्का, कैरो, नयाटोली, एड़ादोन, पतराटोली, सिंजो, बारडीह, सुकुरहुटू गांवों के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना था. डैम से निकले पश्चिमी नहर से अकाशी, बंडा, कोल बंडा, नगड़ा, जामुन टोली, बिराजपुर, बसरी, सुकुरहुटू के ग्रामीणों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना था.
इसी प्रकार पूर्वी भाग में बने नहर से पचागांई, अंबवा, नरौली, खंडा, उत्तका, नयाटोली, एड़ादोन, सढ़ाबे, बक्सी, आदि गांवों के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना था. डैम निर्माण एवं निकाली गयी नहरों से कुछ दिनों तक लोगों को सिंचाई सुविधा मिली. लोग नहर के नीचे पड़नेवाले खेतों में दो फसलें उपजा कर स्वावलंबी होने लगे थे. इसी बीच नहर की मरम्मत के अभाव में नहर बेकार साबित हो गया. लोग पुन: बेरोजगार होने लगे और रोजगार की तलाश में अन्य प्रदेशों में पलायन करने लगे. किसान बेरोजगार हो गये.

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