लोहरदगा : लोहरदगा जिला में 23 जनवरी को हुए दंगा के बाद 15 दिन तक कर्फ्यू लगा रहा. इस दौरान लोहरदगा जिला की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गयी. इसका असर अभी तक बाजारों में देखा जा रहा है. व्यापार पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है. कर्फ्यू के दौरान लगभग 500 करोड़ रुपये के नुकसान होने का अनुमान है.
अर्थव्यवस्था इस कदर चरमरा गयी है कि अभी भी व्यापारी परेशान है. अब तो दुकान, सरकारी कार्यालय, बैंक सामान्य रूप से खुल रहे हैं. लेकिन अभी भी ग्राहक नदारद हैं. दुकानदार ग्राहकों के इंतजार में बैठे हैं, लेकिन ग्राहक इक्का-दुक्का ही नजर आते हैं. व्यापारियों का कहना है कि दंगा के दौरान जो व्यापारिक नुकसान हुआ है उसकी भरपाई अभी निकट भविष्य में संभव नहीं है.
कर्फ्यू के दौरान सबसे अधिक नुकसान बॉक्साइट ट्रकों के बंद रहने से हुआ. बैंक भी लगातार बंद रहे. शादी विवाह के इस मौसम में अशांति के कारण बहुत सारे लोगों ने लोहरदगा में शादी समारोह आयोजित न कर दूसरे जिलों में जाकर कार्यक्रम किया. जिसके कारण सोना चांदी, कपड़ों सहित अन्य समान की बिक्री नहीं हुई.
अर्थव्यवस्था में निर्माण कार्य की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और छड़ सीमेंट का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ, जो अब तक मंदी से नहीं उबर पाया है. ग्रामीण इलाकों से राज मिस्त्री कम आ रहे हैं. निर्माण कार्य धीमी गति से हो रही है. करोड़ों रुपये की सब्जियां बर्बाद हो गयी. जो दूसरे राज्यों में भेजी जाती थी. व्यापार के हर क्षेत्र में नुकसान ने व्यापारियों की कमर तोड़ दी है.
वर्तमान समय में लोहरदगा जिला में बिगड़ी आर्थिक स्थिति के पीछे कोषागार से भुगतान नहीं होना भी एक बड़ा कारण है. 23 दिसंबर से कोषागार से भुगतान कर अघोषित रूप से रोक लगी है, जो अब तक जारी है. कोषागार में लगभग 400 विपत्र पड़े हैं. 12 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि संवेदकों का यहां फंसा है. यह एक अलग परेशानी है जो किसी न किसी रूप में लोहरदगा के व्यापार को नुकसान पहुंचा रहा है.
लोहरदगा चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सचिव राजेश महतो का कहना है कि लोहरदगा में अभी व्यापार की स्थिति बिलकुल सही नहीं है. स्थिति कब तक सुधरेगी, यह समझ में नहीं आ रहा.
हर तबके के व्यापारी परेशान हैं. जिले के छड़ सीमेंट के व्यवसायी विनय अग्रवाल का कहना है कि बाजार में कोई रौनक नहीं है. मंदी का दौर चल रहा है. व्यापारियों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है. बाजार की स्थिति कब तक सुधरेगी, यह उपर वाला ही जानता है. लोहरदगा के व्यापारी इतनी बुरी स्थिति पहले कभी नही देखी गयी थी.
