सेन्हा,लोहरदगा : सेन्हा प्रखंड क्षेत्र के एकागुड़ी खेल मैदान में सरना प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया. इसके मुख्य अतिथि सरना धर्म गुरु जयपाल उरांव, विशिष्ट अतिथि प्रदेश सलाहकार जलेश्वर उरांव, सभा के अध्यक्ष एतवा उरांव, सचिव सोमदेव उरांव शामिल हुए. सभा का शुभारंभ खेल मैदान में धर्म गुरु, सेन्हा प्रखंड अध्यक्ष कहरू उरांव द्वारा […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
सेन्हा,लोहरदगा : सेन्हा प्रखंड क्षेत्र के एकागुड़ी खेल मैदान में सरना प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया. इसके मुख्य अतिथि सरना धर्म गुरु जयपाल उरांव, विशिष्ट अतिथि प्रदेश सलाहकार जलेश्वर उरांव, सभा के अध्यक्ष एतवा उरांव, सचिव सोमदेव उरांव शामिल हुए. सभा का शुभारंभ खेल मैदान में धर्म गुरु, सेन्हा प्रखंड अध्यक्ष कहरू उरांव द्वारा सयुंक्त रूप से सरना झंडा गाड़ कर किया गया. मुख्य अतिथि के यहां पहुंचने पर ग्रामीणों ने पारंपरिक रूप से उनका स्वागत किया. भजन मंडलियों ने भजन प्रस्तुत किया़
मौके पर धर्म गुरु ने कहा कि आदिवासी प्रकृति पूजक होने के नाते पूरे विश्व में पहचाने जाते हैं. सभी आदिवासियों को अपनी नेग चार, धर्म संस्कृति, रीति-रिवाज को अच्छी तरह से जानने की जरूरत है. आज हमारे धर्म संस्कृति पर सभी की नजर है. इसलिए सभी आदिवासियों को एकजुट होकर धर्म की रक्षा के लिए आगे आना होगा. हम प्रकृति पूजक होने के कारण इसकी रक्षा करना सभी का कर्तव्य बनता है.
उन्होंने कहा कि जो आदिवासियों को सरना सनातन और वनवासी कहते हैं उसका पुरजोर विरोध करने की जरूरत है. मौके पर जलेश्वर उरांव ने कहा कि आज सरकार कूटनीति के तहत आदिवासियों की भुईहरि जमीन के अलावे अन्य जमीन को छिनने का कार्य कर रही है. इसलिए सभी को इसके प्रति सचेत रहने की जरूरत है. मौके पर आदिवासी छात्र संघ के जिला अध्यक्ष चंद्रदेव उरांव ने कहा कि समाज को बचाने के लिए हर एक युवा को आगे आना होगा. समाज में अच्छे नेताओं की जरूरत है जो शिक्षा पर जोर देते हुए शिक्षा जगत को और प्रगाढ़ कर सकें. मौके पर जिला अध्यक्ष एतवा उरांव, सचिव सोमदेव उरांव, संरक्षक बिरसा उरांव, लोहरा समाज के केंद्रीय अध्यक्ष बालमुकुंद लोहरा, नेशनल सरना प्रचार समिति के सचिव फूलचंद उरांव आदि ने भी संबोधित किया. मौके पर डाडू पंचायत के मुखिया परसमुनि उरांव, राजमुनि उरांव, सुबोध उरांव, अरविंद उरांव, पंकज उरांव, संजीव उरांव, नीलम उरांव, सुशीला उरांव, आयोजनकर्ता कैला पाहन, पुजार महतो, धर्मदेव मुंडा, लमनी देवी, राजमुनि उरांव, चुमानी उरांव, भीखा उरांव, नागेश्वर उरांव, बुधवा उरांव सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित थे.