परंपरा और नवाचार से बदली ग्रामीण महिलाओं की तकदीर

परंपरा और नवाचार से बदली ग्रामीण महिलाओं की तकदीर

बेतला़ पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के छिपादोहर रेंज में सोमवार को महुआ मित्र-महुआ महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया. इस महोत्सव में स्थानीय ग्रामीण महिलाओं ने अपनी पारंपरिक संस्कृति और आधुनिक नवाचार का अनूठा संगम पेश कर सशक्तिकरण की नयी गाथा लिखी. आजीविका सशक्तिकरण और नवाचार : महोत्सव का मुख्य उद्देश्य महिलाओं की आजीविका को सुदृढ़ करना और महुआ उत्पादों के मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) को बढ़ावा देना है. महिलाओं ने महुआ से बने पारंपरिक लाठा और घाटा के अलावा आधुनिक उत्पाद जैसे लड्डू, बिस्किट, चॉकलेट, केक और महुआ खोया प्रदर्शित किये. इन उत्पादों ने न केवल महिलाओं के कौशल को दर्शाया, बल्कि यह भी साबित किया कि पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप बदला जा सकता है. नेट तकनीक से वनाग्नि पर लगाम : मौके पर डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना ने बताया कि पहले महुआ संग्रह के लिए ग्रामीण जंगल की सूखी पत्तियों में आग लगा देते थे, जिससे वनाग्नि की घटनाएं बढ़ती थीं. साथ ही, बच्चों को पढ़ाई छोड़कर घंटों महुआ चुनना पड़ता था. अब पीटीआर और झामकोफेड के साझा प्रयास से पेड़ों के नीचे नेट (जाल) बिछाने की व्यवस्था की गयी है. बदल रही है तस्वीर : इस आधुनिक पहल से अब महुआ संग्रह में घंटों के बजाय मात्र 5-10 मिनट का समय लगता है. महुआ जमीन पर न गिरकर नेट पर गिरता है, जिससे वह स्वच्छ रहता है और बाजार में उसकी बेहतर कीमत मिल रही है. सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि अब बच्चों को महुआ चुनने के लिए स्कूल नहीं छोड़ना पड़ता और जंगलों में आग लगाने की प्रथा पर भी पूरी तरह रोक लग गयी है, जिससे पर्यावरण सुरक्षित हो रहा है.

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By SHAILESH AMBASHTHA

SHAILESH AMBASHTHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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