बेमौसम बरसात से लातेहार में टूट रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़, महुआ फसल का हो रहा है नुकसान

Latehar News: लातेहार में बेमौसम बारिश से महुआ फसल को भारी नुकसान हुआ है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है. उत्पादन घटने से महुआ के दाम बढ़ गए हैं. किसान और व्यापारी दोनों चिंतित हैं. लगातार खराब मौसम से आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

लातेहार से चंद्रप्रकाश सिंह की रिपोर्ट

Latehar News: झारखंड के लातेहार जिले में बेमौसम की आंधी और बरसात के कारण जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ टूट रही है. महुआ जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. बारिश से महुआ की फसल को काफी नुकसान हो रहा है. महुआ का उत्पादन इस वर्ष मौसम की खराबी के कारण प्रभावित हो गया है. इस कारण ग्रामीण से लेकर इसका व्यापार करने वाले व्यवसायी तक चिंतित हैं.

40 से 60 करोड़ तक होता है महुआ का कारोबार

महुआ कारोबारियों के अनुमान के अनुसार, लातेहार जिले में हर साल करीब 40 से 60 करोड़ रुपये तक महुआ का व्यवसाय होता है. जिले के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए महुआ आमदनी का बेहतर स्रोत माना जाता है. बिना पूंजी लगाए ग्रामीण महुआ से काफी अच्छी आमदनी कर लेते हैं.

क्या कहते है ग्रामीण

महुआ चुन रही पार्वती देवी और रजकलिया देवी ने कहा कि रोज बारिश से महुआ का उत्पादन कम हो रहा है. महुआ से हमलोग घर का कई काम करते है. लेकिन, इस वर्ष मौसम खराब रहने के कारण महुआ का गिरना काफी कम हो गया है. गर्मी में महुआ के उत्पादन में काफी वृद्धि होती है. लेकिन, पिछले चार से पांच दिनों से खराब मौसम के कारण इसके उत्पादन कम हो रहा है. इन दोनों महिलाओं ने आगे बताया कि लगातार मौसम के खराब रहने के कारण डोरी की फसल को नुकसान होने की संभावना है. उन्होंने बताया कि महुआ का सीजन मुख्य रूप से मार्च के अंतिम सप्ताह से लेकर अप्रैल माह तक रहता है.

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बारिश से बढ़ गया महुआ का दाम

खराब मौसम के कारण महुआ के उत्पादन मे कमी आई है. इससे इसके दाम में वृद्धि दर्ज की गई है. व्यवसायी सूरज कुमार ने कहा कि एक सप्ताह में महुआ के दाम काफी वृद्धि दर्ज की गई है. वर्तमान मे 49 रुपये प्रति किलो की बिक्री हो रही है. लेकिन मौसम खराब रहा तो कीमत में और बढ़ातरी हो सकती है. मौसम खराब हुआ तो उत्पादन कम होगा, जिसके कारण इसके दामों में तेजी आएगी.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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