चंदवा प्रखंड के ऐतिहासिक कामता गढ़ परिसर से गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा पूर्ण आस्था के साथ निकाली गयी. रथ पर भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा के विग्रह स्वरूप विराजमान थे. हजारों श्रद्धालुओं ने रथ खींचकर उन्हें मौसीबाड़ी पहुंचाया और क्षेत्र की सुख-समृद्धि व शांति की कामना की. इससे पूर्व पंडित घनश्याम भारद्वाज के नेतृत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से भगवान की पूजा-अर्चना की गयी. शाम को पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ रथयात्रा शुरू हुई. पंडित भारद्वाज ने बताया कि यहां यह परंपरा सदियों पुरानी है. ज्येष्ठ पूर्णिमा को जलयात्रा के बाद 15 दिनों तक भगवान एकांतवास में रहते हैं. इसके बाद आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को रथयात्रा निकाली जाती है. भगवान नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में रहेंगे और एकादशी को मुख्य मंदिर लौटेंगे. राज परिवार के लाल प्रेरित नाथ शाहदेव, लाल प्रदीप नाथ शाहदेव व लाल विक्रम नाथ शाहदेव की देखरेख में पूरा अनुष्ठान संपन्न हुआ.
मेले में रही रौनक, उमड़ी भीड़
रथयात्रा को लेकर कामतागढ़ परिसर में पारंपरिक जतरा-मेले का आयोजन हुआ. इसमें चंदवा समेत आसपास के क्षेत्रों से आये हजारों श्रद्धालुओं ने आकर्षक झूलों और मीना बाजार का आनंद लिया. देर शाम तक मेला परिसर में भारी रौनक देखी गयी. सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम : विधि-व्यवस्था बनाये रखने के लिए लातेहार एसपी कुमार गौरव के निर्देश पर पुलिस निरीक्षक अशोक कुमार के नेतृत्व में काफी संख्या में पुलिस बल तैनात थे. रथयात्रा मार्ग पर पुलिस के साथ-साथ स्वयंसेवकों की टीम भी सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण में सक्रिय रही.
