चंदवा़ प्रखंड के बनहरदी पंचायत में पतरातू विद्युत ऊर्जा निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) द्वारा प्रस्तावित बनहरदी कोल परियोजना को लेकर शुक्रवार को आयोजित ग्रामसभा बेनतीजा रही. वन भूमि पर एफआरए (वन अधिकार अधिनियम) के तहत अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेने के उद्देश्य से तीन मुहान के समीप आयोजित इस बैठक में ग्रामीणों ने कड़ा रुख अख्तियार किया. ग्राम प्रधान इंद्रदेव उरांव की अध्यक्षता में हुई इस ग्रामसभा में ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक उनके अधिकारों और विस्थापन नीति पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, वे एक इंच जमीन के लिए भी सहमति नहीं देंगे. सीओ की सफाई, यह केवल वन भूमि का मामला है : ग्रामीणों की शंकाओं को दूर करने पहुंचे सीओ सुमित कुमार झा ने समझाने का प्रयास किया कि यह ग्रामसभा केवल वन भूमि से संबंधित एनओसी के लिए है. रैयती, गैर मजरूआ या बंदोबस्ती भूमि को लेकर अलग से बैठकें की जायेंगी और रैयतों के मामलों का निष्पादन स्वतंत्र रूप से होगा. हालांकि, ग्रामीण सीओ की किसी भी दलील को मानने को तैयार नहीं दिखे और सर्वसम्मति से एनओसी देने से इनकार कर दिया. ग्रामीणों की दो टूक, पहले हक-अधिकार, फिर खदान : रैयतों ने अपनी समस्याओं को रखते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन और आजीविका जंगल पर निर्भर है. वर्षों से दर्जनों ग्रामीणों के वन पट्टा आवेदन लंबित हैं, जिन्हें अब तक स्वीकृत नहीं किया गया है़ कंपनी प्रबंधन और वरीय अधिकारी पहले यह बतायें कि विस्थापन की स्थिति में ग्रामीणों का लाभ और रोडमैप क्या होगा. ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें डर है कि खनन शुरू होते ही उनके पारंपरिक अधिकार छीन लिये जायेंगे. वरीय अधिकारियों को भेजी जायेगी रिपोर्ट : ग्रामीणों के कड़े विरोध और मांगों को सुनने के बाद सीओ ने कहा कि ग्रामसभा में जो भी बातें और आपत्तियां सामने आयीं हैं, उनसे जिले के वरीय अधिकारियों को अवगत कराया जायेगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि रैयतों के हितों का ध्यान रखा जायेगा. इस मौके पर काफी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष उपस्थित थे, जिन्होंने अपनी जमीन और जंगल को बचाने के लिए एकजुटता दिखायी.
ग्रामसभा में रैयतों के लाभ, विस्थापन नीति व उसका रोड मैप बताये कंपनी : रैयत
ग्रामसभा में रैयतों के लाभ, विस्थापन नीति व उसका रोड मैप बताये कंपनी : रैयत
