बेर, कुसुम व पलाश पेड़ पर लाह की खेती अच्छी

चंदवा : वन उत्पादकता संस्थान रांची के वैज्ञानिक (एफ) डॉ एके पांडेय ने कहा कि लाह की खेती उत्तम आय का स्रोत है. किसान इसकी खेती कर अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं. श्री पांडेय मंगलवार को स्थानीय लाह बीज फार्म में वैज्ञानिक विधि द्वारा लाह की खेती के माध्यम से ग्रामीणों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान […]

चंदवा : वन उत्पादकता संस्थान रांची के वैज्ञानिक (एफ) डॉ एके पांडेय ने कहा कि लाह की खेती उत्तम आय का स्रोत है. किसान इसकी खेती कर अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं. श्री पांडेय मंगलवार को स्थानीय लाह बीज फार्म में वैज्ञानिक विधि द्वारा लाह की खेती के माध्यम से ग्रामीणों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान विषय पर आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे.
उन्होंने बताया कि बेर, कुसुम व पलाश के पेड़ पर लाह की खेती अच्छी होती है. अधिक उत्पादन के लिए इन पेड़ों की छंटाई जरूरी है. वैज्ञानिक (ई) डॉ शरद तिवारी ने बताया कि वैज्ञानिक विधि से एक वर्ष में लाह की चार फसल निकाली जा सकती है. रंगीनी फसल में कतकी व वैशाखी तथा कुसुमी फसल में अगहनी व जेठनी लाह पर चर्चा की.
उन्होंने झारखंड में लाह उत्पादन में आयी गिरावट के प्रमुख कारण बताये. इसके पूर्व जिप उपाध्यक्ष अनिता देवी, प्रमुख चंद्रावती देवी, समाजसेवी रामयश पाठक ने दीप जला कर कार्यशाला का उदघाटन किया. अनुसंधान सहायक वन विष्णुदेव पंडित, एसएन वैद्य, एसएन मिश्र तथा टीए (सी) बसंत कुमार ने किसानों को लाह की खेती के गुर बताये. मौके पर मालहन, डुमारो, हुटाप, बारी, पतराटोली, टुढ़ामू, अलौदिया, चिरो, रेका, छातासेमर समेत कई गांव के किसान मौजूद थे. मुखिया बबन मुंडा के अलावे सुमन सुनील सोरेंग, बिनेश्वर मिंज, धवल कुजूर आदि ने अपनी समस्याओं से वैज्ञानिकों को अवगत कराया. किसानों के बीच बैग, लंच पैकेट व बुक लेट वितरित किये गये. कार्यशाला को समापन बुधवार को होगा.

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