हुनर की नयी कहानी लिख रही हैं उदयपुरा गांव की महिलाएं, दूसरों को भी कर रही हैं प्रेरित
सुनील कुमार झा
लातेहार : वर्ष 2016 में लातेहार जिले के उदयपुरा गांव में सरकार ने शौचालय बनाने के लिए राशि दी़ लेकिन शौचालय बनाने के लिए राजमिस्त्री तैयार नहीं थे़ उनका कहना था कि एक-दो दिन का काम है, लंबे समय का काम चाहिए़ नतीजतन सरकार द्वारा राशि मिलने के बाद भी गांव में शौचालय नहीं बन पा रहे थे. वहीं कई शौचालय आधे-अधूरे बन कर पड़े हुए थे. इसके बाद जिला प्रशासन ने राज मिस्त्री के साथ में करनेवाली महिलाओं को एकत्रित किया.
उन्हें बताया कि वे राजमिस्त्री से अधिक मेहनत करती हैं इसके बावजूद उन्हें 200 रुपये मिलते हैं. महिलाएं भी अगर राजमिस्त्री का काम करें को उनका शौचालय भी बन जायेगा व कमाई भी बढ़ जायेगी. यह सुन उदयापुरा गांव की सुनीता उरांव इस काम के लिए सबसे पहले आगे आयी़ं
उसे सरकार ने प्रशिक्षण दिया. इसके बाद वह जिला की पहली रानी मिस्त्री बन गयी. आठ मार्च को अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर सुनीता को राष्ट्रपति के ने पुरस्कृत किया. सुनीता के जज्बे को देख गांव की महिलाओं को प्रेरणा मिली. गांव के लगभग सभी घरों की महिला जो रेजा का काम करती थीं, देखते-देखते रानी मिस्त्री बन गयीं. गांव में 181 शौचालय बन गये. आज सुनीता उरांव मास्टर ट्रेनर हैं. इतना ही नहीं लातेहार जिले में लगभग 1500 महिलाएं रानी मिस्त्री का काम कर रही है. एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि रानी मिस्त्री का काम राज मिस्त्री से भी बेहतर होता है.
रानी मिस्त्री के हौसले बुलंद, भर रही हैं ऊंची उड़ान : सुनीता से यह पूछने पर कि रानी मिस्त्री का नाम कैसे सामने आया, तो मुस्कुराते हुए कहती हैं कि पुरुष राजमिस्त्री कहलाते हैं, तो महिलाओं ने भी मिस्त्री का काम शुरू किया और आज वह रानी मिस्त्री बन गयीं. आज उदयपुरा गांव में सुनीता जैसी दर्जनों महिलाएं रानी मिस्त्री हैं.
वह कहती हैं कि शौचालय निर्माण से अपने काम को शुरू करनेवाली रानी मिस्त्री आज बड़ी-बड़ी बिल्डिंग बना रही हैं. बातचीत के बीच में ही गांव की आठ दस रानी मिस्त्री जमा हो जाती हैं. मीना देवी, लीलावती देवी, अनीता देवी, कलावती देवी सब रानी मिस्त्री है़ं उदयपुरा गांव की महिलाओं से सीख लेते हुए आसपास के गांव सबासू, जंगलदगा, मुक्का, करमटोली, केलू की महिलाएं भी रानी मिस्त्री का काम कर रही हैं.
बना लिया छह कमरे का मकान
उदयपुरा की महिलाएं आज स्वावलंबन की मिसाल है़ं गांव की मीना देवी कहती हैं कि उसने पहले रानी मिस्त्री की ट्रेनिंग ली़ इसके बाद अपने लिए शौचालय बनाया. आज पति के सहयोग से छह कमरे का मकान बना रही हैं. इसके लिए 2017 में 60 हजार ईंट तैयार की़ मीना कहती हैं कि अगर वह रानी मिस्त्री का काम नहीं जानती तो हजारों रुपये उसे मिस्त्री को देना पड़ता़ इसी पैसे से बालू, सीमेंट सहित अन्य सामान खरीदा, जिससे घर तैयार हो जायेगा.
