प्रतिनिधि, झुमरीतिलैया दिगंबर जैन नया एवं बड़ा मंदिर में परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री 108 धर्म सागर जी महाराज तथा मुनि श्री 108 भाव सागर जी महाराज के सान्निध्य में भगवान श्री शांतिनाथ के जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक महोत्सव का आयोजन विश्व शांतिधारा दिवस के रूप में धूमधाम से किया गया. इस अवसर पर महामस्तकाभिषेक और शांतिधारा का पाठ संपन्न हुआ. संगीतमय पूजन के बाद महिला एवं पुरुष वर्ग ने गुरु के हाथों में शास्त्र अर्पण का सौभाग्य प्राप्त किया.
वैराग्य ही अभय प्रदाता हैनये मंदिर में अभिषेक, शांतिधारा, पूजन और निर्वाण लाडू अर्पण किया गया, वहीं बड़े मंदिर में भगवान श्री शांतिनाथ की विशाल प्रतिमा का महामस्तकाभिषेक और विशिष्ट मंत्रों के साथ शांतिधारा संपन्न हुई. धर्मसभा में मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज ने कहा कि शांतिप्रदाता श्री शांतिनाथ भगवान पुण्यशाली हुए जिन्होंने एक साथ तीन पदों को धारण किया. उनका जन्म चक्रवर्ती पद के साथ हुआ और अंततः सम्मेदशिखर पर्वत पर मोक्ष प्राप्त किया. उन्होंने बताया कि वैराग्य ही अभय प्रदाता है और आत्मकल्याण की दिशा में निरंतर कदम बढ़ाना ही जीवन का सार है.
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज ने कहा कि जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक पूरे विश्व में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है. मोक्ष कल्याणक सबसे अंतिम और सर्वोच्च है, जब आत्मा कर्मबंधन से मुक्त होकर सिद्ध अवस्था को प्राप्त करती है. यह हमें संसार से विरक्ति और आत्मा की स्वतंत्रता की ओर प्रेरित करता है. इस अवसर पर समाज के उप मंत्री नरेंद्र जैन झांझरी, सह मंत्री राज जैन छाबड़ा, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र जैन काला, पंडित अभिषेक जैन शास्त्री सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे.