बाल विवाह रोकना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी

बाल विवाह उन्मूलन व बाल विवाह मुक्त प्रखंड बनाने को लेकर कार्यशाला

: बाल विवाह उन्मूलन व बाल विवाह मुक्त प्रखंड बनाने को लेकर कार्यशाला कोडरमा. बाल विवाह जैसी कुप्रथा व अपराध के उन्मूलन व बाल विवाह मुक्त प्रखंड के निर्माण के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित 100 दिवसीय विशेष अभियान के अंतर्गत शुक्रवार को डोमचांच प्रखंड सभागार में कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला का शुभारंभ बीडीओ भोला पांडेय, सीओ रवींद्र पांडेय, प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी अनिल यादव, जिला परियोजना सहयोगी (एवीए) मो आरिफ अंसारी, बाल संरक्षण पदाधिकारी अर्चना ज्वाला ने संयुक्त रूप से किया. इस दौरान बीडीओ भोला पांडेय ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन और एक जघन्य अपराध है. विवाह के नाम पर कम उम्र के बच्चों के भविष्य, शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ समझौता किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि बाल विवाह बच्चों के जीवन, शिक्षा, स्वास्थ्य और समग्र विकास को प्रभावित करता है, इसलिए इसे रोकना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है. सीओ रवींद्र पांडेय ने कहा कि बाल विवाह की रोकथाम तभी संभव है, जब समाज स्वयं इसके प्रति जागरूक और जिम्मेदार बने. उन्होंने कहा कि प्रशासन, जनप्रतिनिधियों एवं समुदाय के सामूहिक प्रयासों से सकारात्मक बदलाव संभव है और इस दिशा में निरंतर प्रयास आवश्यक है. मो आरिफ अंसारी ने बाल विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला. अर्चना ज्वाला ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास पर गंभीर और दीर्घकालिक प्रभाव डालता है. कार्यशाला में बाल विवाह निषेध पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, सेविकाएं व अन्य हितधारक समूहों के सदस्य आदि मौजूद थे. कार्यशाला को सफल बनाने में महिला पर्यवेक्षिका कुमारी अनुश्री, अफजल अंसारी व छाया कुमारी का अहम योगदान रहा.

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Published by: Deepesh kumar

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