जयनगर. ब्रोकली की सब्जी है औषधिय गुणों से भरपूर है. झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में इसकी खेती हो रही है. जयनगर के नईटांड़, लोहाडंडा, चुटियारों में व्यापक पैमाने पर इसकी खेती हो रही है. यह एक गोभी वर्गीय फसल है. कृषि विज्ञान केंद्र जयनगर कोडरमा के एग्रो फॉरेस्ट्री ऑफिसर रूपेश रंजन ने बताया कि ब्रोकली में फूलगोभी की अपेक्षा प्रोटीन, कैल्शियम, कैरोटीन और विटामिन सी की मात्रा अधिक होती है. ब्रोकली कैंसर रोग की रोकथाम करता है. कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है. राष्ट्रीय कैंसर शोध संस्थान में ब्रोकली को हिंडोलम तीन नामक पदार्थ की खोज की है, जो महिलाओं के स्तन कैंसर में लाभप्रद है. श्री कुमार ने बताया कि ब्रोकली का उपयोग सब्जी और सूप के लिए किया जाता है या स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है. इसके सेवन से मधुमेह, हृदय रोग, मोटापा आदि पर नियंत्रण होता है. हड्डियां मजबूत होती है या लीवर और आंखों के लिए भी फायदेमंद है. कैसे करें ब्रोकली की खेती: रूपेश: उन्होंने बताया कि इसे उपजाऊ भूमि में लगायें. इसके लिए पूसा क्ट्स नंबर वन, पंजाब ब्रोकली, शेरे कश्मीर, पालम कंचन, ब्रोकली शंकर वन प्रजाति का बीज 400-500 ग्राम प्रति हेक्टेयर में लगाना चाहिये. रोग कीट प्रबंधन के लिए उन्होंने बताया कि अर्धपतन में पौधे जमीन की सतह पर गल कर मरने लगते हैं. इससे बचाव के लिए बुआई के 10 दिन बाद कार्बोनडाजीम दवा का घोल बनाकर क्यारी में छिड़काव करें. इसके जड़ गलने से बचाव के लिए भी कार्बोन्डाजीम का छिड़काव करना चाहिये.
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