जयनगर: जयनगर प्रखंड के विभिन्न मुस्लिम बहुल इलाकों में रविवार को अकीदत व एहतराम के साथ आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी का उर्स मनाया गया. मौके पर प्रखंड की विभिन्न मस्जिदों में महफिले मिलाद का आयोजन किया गया. अकीदतमंदों ने में शामिल होकर नात-ए-पाक पेश की और आला हजरत की दीनी व इल्मी खिदमात को याद किया.
जमा मस्जिद में आयोजित महफिले मिलाद को संबोधित करते हुए मौलाना अमीरुद्दीन मिस्बाही ने कहा कि आला हजरत की पूरी जिंदगी कुरआन, सुन्नत और इश्क-ए-रसूल की शिक्षा को आम करने में गुजरी. उनकी तालीम का मकसद केवल इल्म हासिल करना नहीं, बल्कि उस इल्म को अपनी जिंदगी और अपने किरदार में उतारना भी है.
उन्होंने कहा कि आला हजरत का पैगाम हमें नमाज की पाबंदी, सच्चाई, ईमानदारी, अच्छे अखलाक, माता-पिता का सम्मान और जरूरतमंदों की मदद करने की सीख देता है. मुसलमान अपनी जिंदगी को कुरआन और सुन्नत के मुताबिक गुजारें तथा अपने व्यवहार से समाज में मोहब्बत, अमन और भाईचारे का पैगाम दें.
मौलाना मिस्बाही ने कहा कि आज के दौर में नौजवानों को खास तौर पर दीनी और दुनियावी दोनों तरह की शिक्षा हासिल करने की जरूरत है. मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में नौजवान अपने कीमती समय को बर्बाद करने के बजाय इल्म हासिल करने और समाज के लिए बेहतर काम करने में लगाएं. उन्होंने कहा कि आला हजरत की तालीम हमें बुराइयों से बचने और नेक रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती है.
उन्होंने कहा कि इश्क-ए-रसूल के साथ सुन्नतों पर अमल और इंसानों के साथ अच्छा व्यवहार ही एक सच्चे मुसलमान की पहचान है. हमें किसी के लिए दिल में नफरत नहीं रखनी चाहिए, बल्कि जरूरतमंदों की मदद और कमजोरों का सहारा बनना चाहिए. अंत में मुल्क की सलामती की दुआ की गई.
