सारिका भदानी ने अपने ससुर से सीखी ज्योतिष, आज बनायी अलग पहचान
ज्योतिष सरस्वती सम्मान से सम्मानित हो चुकी है सारिका
झुमरीतिलैया : कहते है कि सीखनें की ललक व प्रतिभा हो, तो इनसान किसी उम्र में अपनी अलग पहचान बना सकता है. इस कथन को सत्य कर दिखाया है, शहर के वार्ड नंबर सात निवासी सारिका भदानी ने. जमशेदपुर के एक व्यवसायी परिवार में जन्मी सारिका ने अपनी शिक्षा वहीं से पूरी की. शादी के बाद सारिका तिलैया आ गयी, पर उसकी अलग करने की चाह ने उसे आज एक आम गृहिणी से ज्योतिषाचार्य बना दिया. इस क्षेत्र में नाम कमा चुकी सारिका को कई पुरस्कार मिल चुके हैं. प्रभात खबर से बातचीत में सारिका ने बताया कि उन्होंने अपनी स्नातक की शिक्षा जमशेदपुर महिला कॉलेज से प्राप्त की.
शुरुआत में वह एक साधारण जीवन व्यतीत कर रही थी, लेकिन समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाने की चाहत उन्हें हमेशा रही. जुलाई 2000 में शादी झुमरीतिलैया निवासी स्व मधुसूदन राम भदानी के पुत्र संजय कुमार भदानी से हुई. शादी के बाद उन्हें समाज में एक अलग पहचान का रास्ता मिल गया. स्व मधुसूदन राम भदानी एक चर्चित ज्योतिषाचार्य थे. सारिका ने बताया कि उनके ससुर स्व भदानी ज्योतिष की अच्छी जानकारी रखते थे, उन्हें देख कर मुझे भी इस क्षेत्र में रुचि बढ़ी. ज्योतिष के प्रति मेरी रुचि देख मेरे ससुर ने पूरे स्नेह के साथ मुझे ज्ञान दिया. मेरे ससुर द्वारा दिये गये ज्ञान और मेरी निष्ठा ने मुझे कई स्मरणीय उपलब्धि दिलायी. राजस्थान के कोटा में छह, सात व आठ अप्रैल 2007 को आयोजित तीन दिवसीय इंटरनेशनल ज्योतिष कांफ्रेंस में मुझे मां फलौदी अवार्ड से सम्मानित किया गया. झारखंड की राजधानी रांची में नौ, 10 व 11 सितंबर 2016 को आयोजित तीन दिवसीय दशम पूर्वांचल ज्योतिष सम्मेलन में मुझे ज्योतिष मार्तंड की उपाधि से नवाजा गया.
पुनः झारखंड के ही जमशेदपुर में तीन, चार व पांच फरवरी 2017 को आयोजित 25वें एशियन एस्ट्रोलोजर्स कांफ्रेंस में मुझे ज्योतिष सरस्वती सम्मान व गोल्ड मेडल मिला. इन उपलब्धियों के बाद मेरा हौसला और बढ़ गया और मैं इस क्षेत्र में कर्मठता के साथ तल्लीन होती चली गयी. एशियन कांफ्रेंस 2017 में ही नासा के वैज्ञानिक द्वारा भी मेरे कार्यों की सराहना की गयी.
