– विकाश –
कोडरमा : वर्ष 2013 बीत गया, पर यह वर्ष जिले के लोगों को खुशी की सौगात के साथ दर्द भी दे गया. कोडरमा के लोगों की वर्षो पुरानी मांग गिरिडीह रेल लाइन पर नावाडीह तक पैसेंजर ट्रेन दौड़ी तो झुमरीतिलैया शहर के बीचोंबीच ओवरब्रिज का निर्माण पूरा हुआ, वहीं इससे उलट सतगावां के लाल संतोष के शहीद होने के अलावा दूल्हा-दुल्हन व अन्य की मौत ने लोगों के दिल को झकझोर कर रख दिया. सौगातों व घटनाओं पर एक नजर.
वर्ष 2013 की सबसे बड़ी दो सौगातें
नावाडीह तक चली पैसेंजर ट्रेन: वर्ष 2013 में जिले के लोगों को सबसे बड़ी सौगात के रूप में मिली कोडरमा-नावाडीह पैसेंजर ट्रेन. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भले ही वर्षो पहले कोडरमा-गिरिडीह रेल लाइन की योजना का शिलान्यास किया था, पर 25 जून 13 को इस रेलखंड के नावाडीह तक पैंसेजर ट्रेन को स्थानीय सांसद बाबूलाल मरांडी व विधायक अन्नपूर्णा देवी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस ऐतिहासिक पल के गवाह हजारों लोग बने थे. इसके अलावा हजारीबाग तक ट्रायल इंजन ले जाना भी रेलवे के लिए बड़ी बात रही.
झुमरीतिलैया शहर को मिला ओवरब्रिज: झुमरीतिलैया शहर के लोगों की वर्षो पुरानी मांग ओवरब्रिज निर्माण का कार्य वर्ष 2013 में ही पूर्ण हुआ. ट्रैफिक जाम की समस्या से रेलवे फाटक पर घंटों जूझने वाले लोगों को ओवरब्रिज निर्माण से राहत मिली. 16 अगस्त को मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने ओवरब्रिज का उद्घाटन कर इसे जनता को समर्पित किया.
वर्ष की सबसे बड़ी दो घटनाएं: जिले में वर्ष 2013 की सबसे बड़ी दुखद घटनाओं में शामिल है सतगावां के आइटीबीपी जवान संतोष पासवान पिता देवनारायण पासवान का शहीद होना. उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा के बाद राहत कार्य में लगे एनडीआरएफ के हेलीकाप्टर क्रैश में शहीद हुए संतोष के मामले ने हर किसी के दिल को झकझोर कर रख दिया था. घटना 25 जून को हुई.
दूल्हा दुल्हन की एक साथ हुई मौत: वर्ष भर सड़क हादसों के कारण कोडरमा की सड़कें लाल होती रहीं, पर मई माह के 25 तारीख को सतपुलिया के पास हुई दुर्घटना ने हिला कर रख दिया. शादी कर लौट रहे दूल्हा-दुल्हन की गाड़ी यहां एक पोल से जा टकरायी और मौके पर ही दोनों की मौत हो गई थी.
इस वर्ष जिले में विभिन्न हादसों में 198 लोगों की मौत हुई. खदान हादसे ने भी लोगों को हिला कर रख दिया. मरकच्चो के खरकार पंचायत के पहाड़पुर में पत्थर खदान में हुए हादसे में तो राजू मेहता व मुकेश यादव की मौके पर ही मौत हो गई. इसके अलावा माइका खदानों में भी कई लोग दबकर मौत के शिकार बने.
