जांच के लायक ही नहीं निकला भेजा गया अंडे का सैंपल
कोडरमा : उत्क्रमित मध्य विद्यालय तिलैया बस्ती में खराब अंडा खाने से 150 बच्चों के बीमार होने के मामले में बड़े स्तर की लीपापोती हो गयी है. इस घटना के लिए कौन दोषी है और किस पर कार्रवाई होगी, इसका भी अब निर्धारण कर पाना शायद मुश्किल होगा.
जिला प्रशासन की ओर से खराब अंडे का जो सैंपल जांच के लिए भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण, राज्य खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला, नामकुम रांची भेजा गया था, वह जांच के लायक ही नहीं निकला. प्रयोगशाला के अधिकारी जितेंद्र कुमार सिंह की ओर से जिला प्रशासन को भेजी गयी रिपोर्ट में यह साफ लिखा है कि भेजे गये अंडे का सैंपल इस स्थिति में नहीं है कि इससे होने वाले प्रभाव की जानकारी मिल पाये. सैंपल पूरी तरह डिग्रेडेड व स्पावालड था. ऐसे में सैंपल जांच से यह पता ही नहीं चल सकता कि इसमें क्या नुकसान हुआ, जो बच्चे बीमार पड़े.
सैंपल भेजने में लापरवाही! : अंडा का सैंपल प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ चंद्रमोहन कुमार की देखरेख में भेजा गया था. अब जब सैंपल से यह पता कर पाना ही मुश्किल है कि खराबी का कारण क्या था, तो यह सवाल उठ रहा है कि क्या सैंपल भेजने के समय ही लापरवाही बरती गयी. सवाल यह भी है कि क्या इस मामले में आला अधिकारी अब ठोस कार्रवाई करेंगे, क्योंकि इससे पहले भी घटना के बाद की गई कार्रवाई पर सवाल उठे थे.
काला दिख रहा था अंडा : घटना के दिन सदर अस्पताल में इलाजरत बच्चों ने बताया था कि अंडा काला-काला दिख रहा था, हमने खाने से मना किया पर स्कूल की मैडम ने कहा खाओ कुछ नहीं होगा. खाते ही हमें उल्टी होने लगी. वहीं कुछ बच्चों ने कहा था कि दो-चार अंडे में खून जैसा दिख रहा था. शायद अंडे ने चूजा का रूप ले लिया था.
रिपोर्ट देखी नहीं : डीसी
डीसी छवि रंजन ने कहा कि अंडे के सैंपल से संबंधित इस तरह की रिपोर्ट मैंने देखी नहीं. इस तरह की रिपोर्ट आयी है, तो प्रशासन इस बात की जांच करायेगा कि आखिर लापरवाही किस स्तर से हुई. रिपोर्ट देखने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी.
क्या है मामला
बता दें कि 15 जुलाई को उत्क्रमित मध्य विद्यालय तिलैया बस्ती में मध्याह्न भोजन में अंडा खाने से 150 बच्चे बीमार हो गये थे. डीसी छवि रंजन व शिक्षा मंत्री डाॅ नीरा यादव ने पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिये थे. इसके बाद जांच के लिए अंडा का सैंपल रांची भेजा गया था.
