– अरुण यादव –
केरेडारी : केरेडारी प्रखंड के सलगा पंचायत अंतर्गत कस्वा निरी गांव जंगलों व पहाड़ों से घिरा है. यह गांव विकास की रोशनी से आज तक अछूता है. न ही यहां चलने के लिए कोई पक्की सड़क है और न ही रहने के लिए पक्का मकान.
यहां के लोग कंकरीले व पथरीले रास्तों व नदियों को पार कर केरेडारी मुख्यालय तक पैदल सफर करते हैं. यहां से मुख्यालय की दूरी 14 किमी है. हरिजन व आदिवासी बहुल कस्वे की कुल आबादी एक हजार है.
भोर होते ही निकल पड़ते हैं लोग : कस्वा निरी के लोग मुख्यालय आने के लिए घर से भोर होते ही निकल पड़ते हैं. ताकि लोगों का कार्य समय पर हो सके. ग्रामीणों को बरसात में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. बीमार लोगों का इलाज के अभाव में मौत भी हो जाता है. यहां स्वास्थ्य सुविधा नहीं है. बिजली का खंभा शोभा बना हुआ है.
गांव में सुविधा : यहां एक आंगनबाड़ी केंद्र व एक प्राथमिक विद्यालय है. जो भगवान भरोसे है. यहां कोई भी पदाधिकारी जांच के लिए नहीं जाते. जिससे यहां शिक्षकों व सेविका की ही मन मरजी चलती है.
ग्रामीणों की मांग : निरी के ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पक्का सड़क बनाने, नदियों पर पुल बनाने की मांग डीसी से की है. साथ ही नियमित बिजली आपूर्ति करने की भी मांग की है.
क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि : प्रमुख संजू देवी व सलगा मुखिया पार्वती ने बताया कि क्षेत्र के विकास के लिए हम सभी तत्पर हैं. हमें जो भी योजनाएं मिलेगी. उसे हम जमीन पर उतारने की कोशिश करेंगे.
क्या कहते हैं बीडीओ : बीडीओ रितेश जायसवाल ने बताया कि निरी गांव के लिए मनरेगा योजना से मिट्टी मोरम पथ बनाया जा रहा है. यहां रहने वाले लोगों को सूचीबद्ध इंदिरा आवास का भी लाभ दिया जायेगा. अधिक से अधिक विकास योजना निरी में देने की कोशिश करूंगा.
